झांसी। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के गुरू बाले तिवारी के प्रपौत्र बृहस्पतिवार को झांसी आए। इस दौरान सीपरी बाजार स्थित हीरोज ग्राउंड को देखा। वहीं उनके घर जाकर ट्राफियों को निहारते हुए कहा कि कई सालों से इस घड़ी का इंतजार कर रहे थे।
मूल रूप से सुलतानपुर के रहने वाले मेजर ध्यानचंद के गुरू बाले तिवारी के प्रपौत्र वरुण तिवारी ने बताया कि पिताजी और दादाजी ने बताया था कि वर्ष 1922 में अंग्रेजी सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे। सेना में रिक्रूट ध्यानचंद का खेल देखकर उन्होंने उन्हें हॉकी का अभ्यास देना शुरू किया। अभ्यास के दौरान ध्यानचंद का जोश देखकर उन्होंने कहा कि तुम्हारा खेल अकेले वाला नहीं बल्कि टीम के साथ खेलने वाला है। तब उन्होंने टीम के साथ खेलना शुरू किया। टीम में उनका खेल देकर बड़े-बड़े दांतो तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो जाते थे। उन्होंने बताया कि लगभग आठ सदियाें से मेजर ध्यानचंद परिवार से रिश्ता पूरी तरह से समाप्त हो गया था। आज उस रिश्ते दोबारा से जीवित करने के लिए है।