झांसी। रंगों का पर्व होली की तैयारियां तेज हो गई हैं। महाराष्ट्रीयन परिवार मेहमानों का स्वागत परंपराओं के तहत खास व्यंजन पूरनपोली से करते हैं। झांसी के महाराष्ट्रीयन दूज पर होली खेलते हैं।
होली पर महाराष्ट्रीयन समाज के गणेश मंदिर में रंगारंग कार्यक्रम होंगे। होलिका दहन की भस्म में चंदन, हल्दी, कुमकुम और टेसू के फूलों के रंग मिश्रित कर होली खेली जाएगी। खास बात यह है कि झांसी नगर के महाराष्ट्रीय परिवार के सदस्य दूज पर होली खेलते हैं।
मान्यता है कि नगर के राजा गंगाधर राव का निधन प्रतिपदा पर हुआ था। इससे प्रतिपदा पर महानगर में होली नहीं खेली जाती है। प्रत्येक वर्ष समाज के सभी सदस्य लक्ष्मी तालाब स्थित राजा गंगाधर राव की समाधि पर जाते हैं और पुष्पांजलि अर्पित करते हैं। इसके अगले दिन खूब होली खेलते हैं।
महाराष्ट्र समाज के सदस्य झांसी की परंपराओं के साथ होली मनाते हैं। भगवान को पूरणपोली का प्रसाद लगता है। जो गुड़, शक्कर और चना की दाल से बनता है।
गजानन खानवलकर, सचिव गणेश मंदिर कमेटी
घरों में होलिका दहन दोपहर तक ही कर लिया जाता है। रात में सामूहिक रूप से होलिका दहन होता है। महाराष्ट्र में प्रतिपदा को धूली वंदन कहते हैं और होली खेलते हैं।
उज्जवल देवधर, सह सचिव गणेश मंदिर कमेटी
घरों में कुलधर्म की पूजा होती है। रेशमी वस्त्र पहनकर महिलाएं पूरनपोली, श्रीखंड या केले का रायता बनाती है। घरों में ब्राह्मणों व सौभाग्यवती महिलाओं को भोजन कराया जाता है।
राहुल खांडेकर, सचिव महाराष्ट्रीय समिति
महाराष्ट्र गणेश मंदिर में रंगोत्सव का भव्य आयोजन होगा। इसमें भगवान गणेश जी का रंग अर्पण किया जाएगा। साथ ही मराठी भजन व फाग गाए जाएंगे।
राघव इंदापुरकर, सह सचिव महाराष्ट्रीय समिति