झांसी। शुक्रवार को राजकीय संग्रहालय में दीवान हरदौल शोध संस्थान संस्कृति विभाग और बुंदेली वीर मंच सहित कई संगठनों ने दीवान लाला हरदौल की जयंती पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि लाला हरदौल बुंदेलखंड की संस्कृति के महानायक हैं।
मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि बुंदेलखंड के इतिहास व लोक संस्कृति में लाला हरदौल का विशेष स्थान है। बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला ने कहा कि लाला हरदौल बुंदेलखंड की पहचान है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि लाला हरदौल ने बुंदेलखंड की सुरक्षा के लिए व्यापक संघर्ष किया था। मुख्य अतिथि डॉ. रविंद्र शुक्ला ने कहा कि लाला हरदौल को मुगल शासक अपने रास्ते से हटाना चाह रहे थे। डॉ. चित्रगुप्त श्रीवास्तव ने कहा कि लाला हरदौल को विष देना एक राजनीतिक कुचक्र था। डॉ. पुनीत बिसारिया ने कहा कि हरदौल जी पर विश्वविद्यालयों में शोध होना चाहिए। संगोष्ठी में प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे, डॉ. अंजनी श्रीवास्तव, रामेश्वर गिरी, संतोष पटैरिया, सुखदेव व्यास, नीति शास्त्री और पारसमणि अग्रवाल ने भी विचार व्यक्त किए।