झांसी। उलमा ने रमजान में रोजे और इस्लाम के बारे में जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इन हेल्पलाइन नंबरों पर लोग कॉल करके और व्हाट्सएप मेसेज भेजकर सवालात पूछ रहे हैं। शहर की एक महिला ने मंगलवार को व्हाट्सएप मेसेज कर पूछा कि चार माह के बच्चे को आंचल से दूध पिलाती हूं, रोजे रखना जायज है या नहीं ? इस पर उलमा ने जवाब दिया कि बच्चे का हक मारकर रोजा रखना जायज नहीं है। बाद में कजा (यानि आम दिनों में) रोजे रख सकती हैं।
इसी तरह हेल्पलाइन नंबर पर ताज कंपाउंड निवासी सलमान ने पूछा कि रोजे की हालत में पत्नी के साथ बाइक से जा रहा था। अचानक एक्सीडेंट हो गया। पत्नी बेहोश होने लगी। इस पर उसने घबराकर उसे पानी पिला दिया। क्या यह गुनाह में शामिल होगा? इस पर उलमा ने जवाब दिया कि यह गुनाह में शुमार नहीं है। बाद में कजा रोजा अथवा फिदिया (गरीब को पैसा ) अदा करना होगा।
रोजे की हालत में आंख में दवा डाली जा सकती है ? इस पर उलमा ने जवाब दिया कि आंखों में ड्राप डालने से रोजा नहीं टूटता है लेकिन नाक और कान में दवा डालने से रोजा टूट जाता है। तीन माह की गर्भवती हूं तो क्या रोजे रख सकती हूं ? इस पर उलमा ने जवाब दिया कि इस हालत में रोजे रखने पर मनाही नहीं है, लेकिन रोजा न रखें तो बेहतर होगा। बाद में कजा रोजे रखे जा सकते हैं। इसका कोई गुनाह नहीं होगा। रोजे में गर्मी के कारण नकसीर फूट गई (गर्मी के कारण नाक से खून आना) तो क्या रोजा टूट गया है? जवाब में बताया गया कि रोजा नहीं टूटेगा। एक शुगर पीड़ित बुजुर्ग ने पूछा कि रोजे की हालत में कम और ज्यादा हो जाती है। इसलिए अगर रोजा न रखें तो गुनाह होगा ? जवाब में बताया गया कि बीमारी के हालत में रोजा रखने पर रियायत है। स्वस्थ होने पर बाद में रोजे रखे जा सकते हैं। इसका कोई गुनाह नहीं होगा।