झांसी। नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में सफाई, सड़क, नाली जैसी आम लोगों की परेशानियों पर कोई चर्चा ही नहीं हुई। करीब सात घंटे की मैराथन बैठक के दौरान कार्यकारिणी सिर्फ चुनिंदा जमीनी विवाद सुलझाने में उलझी रही।
नगर निगम कार्यकारिणी की यह बैठक काफी अहम थी। निगम इन दिनों सबसे बड़ी वित्तीय समस्या से जूझ रहा है। पैसों की भारी-भरकम कटौती के चलते कर्मचारियों का वेतन संकट में है। विकास कार्य भी लटक गए हैं। डेंगू और बुखार से शहर तप रहा है। नियमित सफाई न होने की शिकायतों का अंबार है। डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की एवज में यूजर चार्ज में चार गुना की बढ़ोत्तरी हो गई। निगम के सामने पेश इन चुनौतियों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गई थी लेकिन, अधिकांश समय सिर्फ जमीन से जुड़े मामले ही छाए रहे।
दोपहर ग्यारह बजे महापौर रामतीर्थ सिंघल की अध्यक्षता में बैठक आरंभ हुई। पार्षदों ने पिछली बैठक की अनुपालन आख्या पेश करने की मांग की। इसके पेश होते ही पार्षदों ने सवालों की छड़ी लगा दी। पार्षद दीपेश सिंह दीपू, महेश गौतम, विकास खत्री समेत अन्य पार्षदों ने पिछली बैठक में एक आराजी में हुए अवैध कब्जे के खिलाफ तय हुई कार्रवाई के बारे में जानना चाहा। रक्सा-शिवपुरी हाइवे स्थित एक आश्रम के अवैध कब्जे का मामला भी जोर-शोर से उठा। निगम अफसर कोई जवाब नहीं दे सके। पार्षदों ने निगमकर्मियों की मिली-भगत से अवैध कब्जे के आरोप लगाए। निगम की जमीन पर बाउंड्रीवाल नहीं बनवाई जा रही। उपसभापति सुनील नैनवानी ने संपत्ति विभाग की जिम्मेदारी नियमित कर्मचारी को दिए जाने की जरूरत बताई। आज दिन भर चली बैठक में एजेंडे पर कोई भी चर्चा नहीं हो सकी। शाम को महापौर ने बृहस्पतिवार के लिए बैठक स्थगित कर दी। बैठक में नगर आयुक्त अवनीश राय, अपर नगर आयुक्त शादाब असलम, पूर्व उपसभापति पार्षद राजेश त्रिपाठी, उमेश जोशी, मुकेश कुमार उर्फ बंटी सोनी, जामवती, भरत सेन, राजू साहू, विमल किशोर, जुगल किशोर समेत उपस्थित रहे।
नामांतरण शुल्क बढ़ोत्तरी पर उपसभापति ने जताया विरोध
नामांतरण शुल्क में प्रस्तावित बढ़ोत्तरी पर उपसभापति सुनील नैनवानी ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि दुकानों का नामांतरण शुल्क सर्किल रेट के मुताबिक कई गुना बढ़ गया है। इस वजह से दुकानदार नामांतरण कराने को राजी नहीं हो रहे हैं। उपसभापति ने इस शुल्क में कमी किए जाने की जरूरत बताई।
यूजर चार्ज बढ़ोत्तरी पर पार्षदों ने साधी चुप्पी
डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के काम में लगी नई कूड़ा कंपनी ने यूजर चार्ज में चार गुना बढ़ोत्तरी करते हुए इसे एक सौ पच्चीस रुपये प्रतिमाह कर दिया। ईडब्ल्यूएस एवं निचले आय वर्ग के लोगों के लिए भी किसी रियायत का प्रावधान नहीं किया। हर किसी से इसी दर पर यूजर चार्ज वसूला जा रहा है। बड़े बंगले में रहने वालों की तरह छोटे घरों में रहने वाले भी पिछले कई माह से एक सौ पच्चीस रुपये प्रतिमाह चुका रहे हैं। कई जगहों पर लोगों की शिकायत थी कि एजेंसी घरों से कूड़ा नहीं लेती। पार्षदों ने इसके विरोध का एलान किया था लेकिन, कार्यकारिणी बैठक में आज इस मुद्दे को लेकर पार्षदों के बीच शांति रही। 14 जुलाई को कार्यकारिणी सदस्य मुकेश सोनी की अगुवाई में पार्षदों ने इसके विरोध में महापौर को ज्ञापन भी सौंपा था लेकिन, बैठक के दौरान इन पार्षदों ने भी चुप्पी साधे रखी।
कैंटीलीवर एवं होर्डिग में गड़बड़झाले पर घिरे अफसर
महानगर में तयशुदा संख्या से अधिक कैंटीलीवर, होर्डिंग, यूनीपोल लगाए जाने को लेकर पार्षदों ने अफसरों को घेरा। इस गड़बड़झाले को अमर उजाला ने ही उजागर किया था। इसमें बताया गया था कि निर्धारित संख्या से काफी अधिक विज्ञापन बोर्ड लग हैं। इनसे निगम को कोई आय नहीं हो रही। अफसरों की लापरवाही से कंपनियां निगम को राजस्व भी नहीं दे रही हैं। कार्यकारिणी पार्षद महेश गौतम ने अमर उजाला की खबरों का जिक्र करते हुए अफसरों से जवाब की मांग की लेकिन, निगम अफसर जवाब नहीं दे सके। प्रभारी अधिकारी धीरेंद्र मोहन कटियार पार्षदोें को मानकों के बारे में भी नहीं बता सके। पार्षदों ने इसको लेकर गहरा रोष जताया। पार्षदों का कहना था कि इलाइट चौराहा समेत कई इलाके ऐसे हैं जहां होर्डिंग नहीं लग सकी लेकिन, अफसरों की मिलीभगत से यह काम हो रहा है।