पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने शनिवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में एंबेसी बंद करके गलती की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए था। कुछ लोग तालिबान के नए प्रारूप को अच्छा बता रहे हैं। लेकिन, अभी इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
खुर्शीद ने कहा कि अफगानिस्तान में आज तालिबान हावी हो गया है। भारत की दो चिंताएं हैं। पहली वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना। अमेरिका वहां है नहीं। चीन से हमारे संबंध बहुत मधुर नहीं हैं। दूसरी भारत ने अफगानिस्तान में शिक्षा, सड़क, बिजली, पार्लियामेंट, डैम बनाने आदि पर लाखों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। बड़ा सवाल ये है कि क्या इन सब पर पानी फिर गया?
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब कई लोग कह रहे थे कि तालिबान अफगानिस्तान पर काबिज हो जाएगा तब भारत को अच्छे संबंध वाले अफगानिस्तान के बड़े नेताओं से बातचीत करके संभावनाओं पर चर्चा करनी चाहिए थी। उल्टा भारत अमेरिका से बात करके ये दावा करता रहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा।
एक सवाल पर उन्होंने कहा कि तालिबान बदल गया इसका कोई तथ्य नहीं है। वहां की सड़कों पर जो हाल है, उससे शंकाएं हैं कि तालिबान अभी संभला नहीं है। सर्वदलीय बैठक में अफगानिस्तान के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने चिंता जताई थी।आठ-नौ प्रश्न दिए थे। अब तक केंद्र सरकार ने कुछ नहीं बताया नहीं कि क्या हो रहा है?
दुनिया में तालिबान के संबंध में जो बात हो रही है, उसमें भारत को शामिल नहीं किया जा रहा है। पूर्व मंत्री बोले कि कांग्रेस की सरकार में हमेशा नॉर्दन एलायंस को दवा, पुलिस ट्रेनिंग आदि से मदद की गई। यूनाइटेड नेशन में भी उनकी आवाज बने। इस दौरान घोषणा पत्र समिति के सदस्य अमिताभ दुबे, सुप्रिया श्रीनेत, पूर्व मंत्री प्रदीप जैन, राष्ट्रीय सचिव सुधांशु त्रिपाठी, प्रदेश महासचिव राहुल रिछारिया, महानगर अध्यक्ष अरविंद वशिष्ठ, जिलाध्यक्ष भगवान दास कोरी, राजेंद्र शर्मा, सुरेंद्र सक्सेना मौजूद रहे।