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दो साल में पचास करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी थी

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झांसी। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत झांसी में लगाए गए 730 ट्रांसफार्मर पर इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने के नाम पर बड़ा गोलमाल किया गया था। अफसरों ने दावा किया था कि हर ट्रांसफार्मर पर मीटर लगाया गया है लेकिन सत्यापन में कहीं भी मीटर नहीं मिला। इसमें ही पचास करोड़ से अधिक का घपला सामने आया था। उस दौरान अधीक्षण अभियंता (ग्रामीण) जयगोपाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता (नगर) शशिकांत, उप मुख्य लेखाधिकारी आर के त्रिवेदी, अधीक्षण अभियंता (वाणिज्यिक मुख्यालय) मोर मुकुट शर्मा समेत दो लिपिकों को निलंबित किया गया था।
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उस वक्त गांवों में कराए जा रहे विद्युतीकरण में बिजली के खंभे लगाना, तार खींचना, ट्रांसफार्मर लगाना और उनके ऊपर इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने का काम होना था। जिले में 144 गांवों में विद्युतीकरण किया गया। इस दौरान उप्र पावर कारपोरेशन को शिकायत मिली कि झांसी में योजना के अंतर्गत हुए टेंडर और सामग्री की खरीद में गड़बड़ियां की गई हैं। इस पर कारपोरेशन ने मामले की जांच कराई। जांच के लिए लखनऊ स्थित विद्युत विभाग के शक्ति भवन के तत्कालीन एसपी विजिलेंस, केस्को के तत्कालीन डायरेक्टर, आगरा के तत्कालीन फाइनेंस डायरेक्टर समेत अन्य अधिकारियों की टीम जांच के लिए झांसी आईं थी। टीम ने एक अप्रैल 2011 से लेकर 31 मार्च 2013 तक के रिकार्ड को जब्त कर उसकी जांच की। जांच में पचास करोड़ से भी अधिक की गड़बड़ी पाई गई थी। टीम ने जांच रिपोर्ट कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक को सौंपी थी। कई दूसरी एजेंसियों से भी जांच कराई गई। बाद में करीब छह साल बाद पांच जुलाई 2019 को थाना नबाबाद में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। लेकिन हुआ कुछ नहीं। एफआईआर से लेकर अब तक लंबा अरसा गुजर गया। अब बड़ा सवाल यह है कि कब दोष सिद्ध होगा और कब कार्रवाई होगी।
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23 गांवों में किया गया था भौतिक सत्यापन
जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर 23 गांवों में योजना के अंतर्गत किए गए कार्यों का सत्यापन कराया गया था। ग्राम सिजौरा, कनौरा, सितौरा, बसरिया, डिकौली, गौंती, इटौरा, रानापुरा, मंगूसा, बकायन, गढ़मऊ, लेवा, दिनैरा, पालर, बमनुवां, बाबई, सुकूपुरा, कायला, सरवा, पठारी, सरवां, गौंती आदि गांवों में जांच के दौरान पता चला था कि 730 ट्रांसफार्मर लगाए गए, लेकिन किसी में इलेक्ट्रानिक मीटर नहीं लगाया गया था। 9505 खंभों का प्रयोग हुआ था, लेकिन लगभग 4752 खंभों में मानक के अनुरूप ग्राउटिंग (खंभों का सीमेंट में जाम करना) नहीं की गई थी। कंक्रीट का मिक्चर भी कम डाला गया था। खंभों के नीचे स्टोन पैड नहीं डाले गए थे।
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राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत यह बहुत पुराना मामला है। इस बारे में कुछ भी नहीं बता सकते। उच्च अधिकारियों से जो निर्देश मिलेंगे, उस आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
- शैलेंद्र कटियार
अधिशासी अभियंता ग्रामीण
1600 करोड़ के बिजली घोटाले में फंस रहे दस से भी ज्यादा अफसर
झांसी। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में 1600 करोड़ के घोटाले की विजिलेंस जांच अंतिम दौर में पहुंच गई है। आरोपियों व गवाहों के बयान दर्ज कर लिए हैं। गांवों का फील्ड सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही इस घोटाले में आठ नामजद और बाकी कई अन्य अफसर फंस रहे हैं। विद्युतीकरण में लगी कंपनी भी कार्रवाई की जद में है।
साल 2005-06 में झांसी समेत प्रदेश के 13 जिलों में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत काम हुआ था। इसके तहत वंचित गांवों तक बिजली पहुंचाई जानी थी। लेकिन, योजना के हकीकत में बदलने से पहले ही इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो गया था। 1600 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। विजिलेंस की ओर से 05 जुलाई 2019 को झांसी के थाना नवाबाद में इस घोटाले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उप्र सतर्कता अधिष्ठान, सेक्टर-झांसी के निरीक्षक अजीत कुमार ने बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता लोकेश कुमार, सहायक अभियंता प्रदीप कुमार सिन्हा व अनुभव कुमार, अवर अभियंता हरीश कुमार, जंग सिंह, भगवंत सिंह, शशिवेंद्र व योगेंद्र सिंह तथा आईबीआरसीएल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट लिमिटेड हैदराबाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद विजिलेंस द्वारा खुली जांच शुरू कर दी गई थी। सूत्रों के अनुसार विजिलेंस जांच का दायरा बढ़ने के साथ घोटाले में कई और नाम सामने आए हैं, जिन पर जल्द शिकंजा कसा जाएगा। विजिलेंस द्वारा आरोपियों व गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जिन गांवों में ये योजना लागू की गई थी, उसका भी फील्ड सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। विजिलेंस अपनी जांच रिपोर्ट जल्द शासन को सौंप देगी।
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