रानी लक्ष्मीबाई के क्र ांतिपथ को केंद्र के पर्यटन मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। वित्तीय स्वीकृति से पहले उसके द्वारा चयनित आर्किटेक्टों के दल ने बृहस्पतिवार को प्रोजेक्ट में शामिल स्थलों किला, गणेश मंदिर, रानी महल, तालबेहट के किले का भ्रमण किया। अब पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि जनवरी में कार्य के लिए धनराशि आवंटित हो जाएगी। इससे जल्द ही क्रांतिपथ पर काम शुरू होने की उम्मीद है।
लगभग चार वर्षों से रानी लक्ष्मीबाई के क्रांतिपथ को लेकर पर्यटन, पुरातत्व व अन्य विभाग संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। उद्देश्य रानी लक्ष्मीबाई से जुडे़ स्थलों को संवारना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना है। पूर्व में लगभग 213 करोड़ रुपये का बजट था। इनमें मध्य प्रदेश के भी जिले शामिल थे। लेकिन इसके बाद तीन बार प्रोजेक्ट को संशोधित कर, इसमें से मध्य प्रदेश को हटा दिया गया था।
बीते नवंबर में केंद्र ने रानी के क्रांतिपथ प्रोजेक्ट को स्वदेश दर्शन योजना में शामिल कर इसे मंजूर किया था। जो 18 करोड़ 22 लाख का है। इसे वित्तीय स्वीकृति देने से पहले केंद्र द्वारा चयनित सलाहकारों व आर्किटेक्टों के दल ने बीते बुधवार व बृहस्पतिवार को क्रांतिपथ के स्थलों रानी का दुर्ग, बरुआसागर का किला, रानी महल, गणेश मंदिर, तालबेहट के किला का निरीक्षण किया। दल में वरिष्ठ सलाहकार व आर्किटेक्ट स्निग्ध कुमार, आशीष अवस्थी व उनके साथ पर्यटन विभाग के उपनिदेशक आर के रावत रहे। उपनिदेशक आर के रावत के मुताबिक दल अपनी रिपोर्ट केंद्र के पर्यटन मंत्रालय को देगा। संभावना है जनवरी में धनराशि आवंटित हो जाएगी और काम शुरू हो जाएगा।
कई कामों को दी है सहमति
आर्किटेक्टों के दल ने रानी के क्रांति पथ प्रोजेक्ट के कई कामों को सहमति दी है। इनमें बरुआसागर किला में पाथ वे का निर्माण, सोलर लाइट, पार्किंग, रानी के दुर्ग में मौजूद वह स्थल जहां से रानी कूदीं थीं की सुंदरता को बढ़ाने, साइनिंग बोर्ड लगाने, दुर्ग के बाहर हिस्से में गाड़ियों की पार्किंग, गणेश मंदिर में छत का निर्माण, नालियों का कवर्ड करने, रानी महल के सामने हो रही पार्किंग में इंटर लाकिंग व्यवस्था कराना, रानी महल का रंग रोगन, बाहर लगी ग्रिल को बदलना आदि है। पर्यटन विभाग के अनुसार दल ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के कामों को सहमति दे दी है। अब धनराशि आवंटन का इंतजार है।
बुंदेली कलाकृतियों के लिए खुलेगी शॉप
ओरछा, खजुराहो की तरह झांसी के दुर्ग के बाहर भी बुंदेली कलाकृतियों के लिए आकर्षक शॉप खोली जाएगी। इस पर दल ने सहमति दी है। ताकि देश - विदेश के सैलानी इन्हें देख सकें। इन कलाकृतियों में रानी लक्ष्मीबाई की मूर्तियां, कठपुतलियां, लकड़ी व मिट्टी से बने खिलौने आदि होंगे।