झांसी। आजादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा घटना के शताब्दी समारोह के तहत हिंदी दिवस पर राजकीय संग्रहालय की क्षेत्रीय इकाई, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र द्वारा स्वतंत्रता संग्राम एवं हिंदी साहित्य विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी का अहम योगदान रहा है।
कार्यक्रम में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. मुन्ना तिवारी ने बताया कि हाल ही में हुए अंतरराष्ट्रीय शोध में पाया गया कि विश्व में हिंदी से सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। विदेशियों में भी यह भाषा लोकप्रिय होती जा रही है। मोहन नेपाली ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने में स्वतंत्रता परक काव्य रचना करना दुष्कर था। उन्होंने कहा कि झांसी जिले के कवि सियाशरण गुप्त एवं सुभाष चंद्र बोस से मुलाकात का वर्णन किया। समाजसेवी डॉ. नीति शास्त्री ने हिंदी को हृदय की भाषा बताया। विमलेंदु अड़जरिया ने वीर रस की कविता का पाठ किया। मुकुंद मेहरोत्रा ने सरदार वल्लभ भाई पटेल एवं नेहरू जी के हिंदी में हुए संवाद एवं उसके विलक्षण प्रभाव का उल्लेख किया। डॉ. एसके दुबे ने कहा कि बहादुर कवियों और साहित्यकारों का कार्य स्वतंत्रता से पहले किसी भी क्रांतिकारी से कम नहीं था। जीवनधारा फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रदीप तिवारी ने कवियों को स्वतंत्रता आंदोलन में जन-जन में वीरता का संचार करने वाला बताया। इस मौके पर डॉ. अशोक मुस्तारिया, सुदर्शन शिवहरे, अनिल कुशवाहा, मुकेश कुमार, मुकेश रायकवार, रमेश प्रसाद, रिंकी श्रीवास्तव, दिव्या प्रजापति, सियाराम, ओम प्रकाश, अरविंद, संजय, मनीष मौजूद रहे। डॉ. मनमोहन मनु ने आभार व्यक्त किया।