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हैश टैग प्रकरण: तीनों कॉलेज के छात्र फंसे

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झांसी। बीएएमएस छात्र-छात्राओं के नंबर बढ़ाने के फर्जीवाड़े की जांच को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा गठित समिति ने कॉपियों की डिकोडिंग करा ली है। इसमें बुंदेलखंड के तीनों ही कॉलेजों के छात्र-छात्राओं की कॉपियों के पहले पन्ने पर हैश टैग या फिर कोई अन्य चिह्न मिला है। किसी कॉलेज की ज्यादा तो किसी की कुछ कॉपियों में एक समान चिह्न सामने आया है।
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आयुर्वेदिक कॉलेज के खिलाफ नंबर बढ़ाने के खेल की जांच एक व्यक्ति ने विश्वविद्यालय प्रशासन से की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बीयू प्रशासन ने जांच कराई तो 3200 कॉपियों में से 500 उत्तर पुस्तिकाओं में एक सामन चिह्न मिला। मामले की जांच के लिए बीयू प्रशासन ने दो सदस्यीय कमेटी का भी गठन कर दिया है। जैसे-जैसे जांच बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे कड़ियां खुलती जा रही हैं। कॉपियों की डिकोडिंग में सामने आ गया है कि चिह्न बनाने वाली कॉपियों किसी एक कॉलेज की नहीं, बल्कि तीनों महाविद्यालयों की हैं। हालांकि, किसी कॉलेज में बहुत अधिक संख्या में तो किसी में कुछ ही कॉपियों में ये साइन बनाया गया है। खास बात ये है कि अलग-अलग वर्षों के विद्यार्थियों ने अलग-अलग साइन बनाए हैं। कई कॉपियों के पहले पन्ने पर हैश टैग, कई में स्वास्तिक का साइन बना हुआ मिला है। तो कुछ ने ओम का चिह्न बनाया है। इन कॉपियों में औसत से ज्यादा अंक दिए गए हैं। दो सप्ताह के अंदर कमेटी अपनी जांच पूरी कर कुलपति को सौंप सकती है।
समिति मामले की गहनता से जांच कर रही है। शुरूआती जांच में सामने आया है कि कॉपियों पर चिह्न किसी एक कॉलेज के नहीं, बल्कि तीनों महाविद्यालयों के छात्रों ने बनाए हैं। रिपोर्ट आने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बीयू।
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