फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भूल गए सब कुछ, याद नहीं अब कुछ

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। सीबीएसई और आईसीएसई की मिड टर्म बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। इसे लेकर परीक्षार्थ्यों की तैयारी अंतिम दौर में है। इस बीच विद्यार्थियों को तनाव घेर रहा है। ऐसा इसलिए है कि कोरोना काल में विद्यालय बंद होने से डेढ़ साल से विद्यार्थी घर से परीक्षा दे रहे थे। अब सीधे बोर्ड परीक्षा में बैठना है। इसके चलते विद्यार्थियों की नींद उड़ी हुई है। वे याद किया हुआ भूल जा रहे हैं। हर सप्ताह करीब तीन से चार मामले मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। ऐसे विद्यार्थियों की काउंसलिंग की जा रही है।
विज्ञापन

कोरोना संक्रमण के चलते डेढ़ साल से विद्यालय बंद चल रहे थे। विद्यालयों में आनलाइन कक्षाएं चल रही थीं। इस दौरान परीक्षाएं भी ऑनलाइन हुईं। वहीं बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों को प्रोन्नत किया गया। अब कोरोना की स्थिति सामान्य होने पर स्कूल खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही आईसीएसई और सीबीएसई की मिड टर्म परीक्षाएं भी इसी सप्ताह शुरू होनी हैं। परीक्षा में 50 फीसदी कोर्स से प्रश्नपत्र आना है। साथ ही बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे, लेकिन विद्यार्थी परीक्षा को लेकर चिंता में है। छात्र- छात्राएं मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। उनको रात में नींद ना आना, भूख ना लगना और याद किया सब भूल जाना जैसी समस्याएं आ रही हैं।
हर सप्ताह दो से तीन छात्र आ रहे हैं, जो मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। छात्र डरें नहीं, बस मन शांत रखें। तनाव को कम करने के लिए योगा करना सबसे अहम है। पैटर्न बनाकर पढाई करना सबसे सही तरीका है। मोबाइल का इस्तेमाल मन को शांत करने के लिए न करें। उससे बेहतर है कि आप कुछ देर छत पर टहल लें या परिवार, पड़ोसियों या दोस्तों आमने- सामने बैठकर बात करें। संगीत मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है। वे बताती हैं कि छात्र उनके पास आकर शिकायत करते हैं कि वे भूल जाते हैं। ऐसा सिर्फ डर और तनाव की वजह से है। 4-5 घंटे पढाई के बाद कुछ देर आराम करें। - डॉ. जाफरीन, मनोचिकित्सक
विज्ञापन

विद्यार्थियों में काफी उत्साह है क्योंकि वे दो साल बाद परीक्षाएं दे रहे हैं। डर सिर्फ बहुविकल्पीय प्रश्नों का है वह भी तब तक जब तक वे परीक्षा नहीं दे देते। एक पेपर देने के बाद डर अपने आप कम हो जाएगा। बहुविकल्पीय प्रश्न बहुत आसान हैं कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं है। बस अपने मन में आत्मविश्वास बढ़ाएं। साथ ही माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे को डांटे नहीं उनकी मानसिक स्थिति समझते हुए उनसे बात करें।- नितिन विलियम्स, प्रधानाचार्य ब्लू वेल्स पब्लिक स्कूल
छात्रों को डर सिर्फ इस वजह से है क्योंकि वे दो साल से घर से परीक्षा दे रहे थे। लक्ष्य निर्धारित कर रोजाना पढ़ाई करें। रात-रात भर पढ़ने के बजाय दिन में पढ़ें और रात को भरपूर नींद लें। पढाई का हौव्वा ना बनाएं, परीक्षा में वही आएगा जो आपकी किताब में है। इसलिए परीक्षा का डर मन से निकाल कर पढ़ाई करना जरूरी है। - अभिषेक मिश्रा, शिक्षक
दो भाग में परीक्षा होने से डर ज्यादा लग रहा है। बहुविकल्पीय और थ्योरिटिकल दोनों तरह की परीक्षाओं की वजह से हमें परेशानी हो रही है। -सूर्यांश पथरौल, कक्षा 10
परीक्षा का डर इस वजह से है क्योंकि दो साल से घर से पढाई कर रहे थे। अब जो याद करते है वह भूल जा रहे हैं। ना तो भूख लगती है ना नींद आती है।- नीरज कुशवाहा कक्षा 12
विज्ञापन

मैनें पहले ही परीक्षा के हिसाब से तैयारी शुरू कर दी थी, नियमित रूप से चार्ट बनाकर पढ़ाई करने से आसानी हो गई है। -मिताशीं चंदेल, कक्षा12
पहले डर लग रहा था लेकिन अब परीक्षा के पैटर्न के आधार पर घर पर तैयारी करने से डर थोड़ा कम हो गया है। - ईशा त्यागी, कक्षा 12
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें