झांसी। मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी से लाश को श्मशान घाट तक पहुंचाने में परिजनों को भ्रष्ट सिस्टम द्वारा बनाए गए पांच ‘टैक्स’ चुकाने पड़ रहे हैं। कोई भाई तो कोई बेटे के शव को लेकर बदहवास हालात में जब मोर्चरी पहुंचता है, तो उसके दुख-दर्द को दोगुना करने के लिए सौदेबाज तैयार रहते हैं। मृत घोषित करने के लिए ईसीजी करानी है तो पैसे लगते हैं। पोस्टमार्टम के लिए डेथ सर्टिफिकेट बनवाना है तो वसूली होती है। यहां तक कि मोर्चरी बंद होने के बाद इमरजेंसी से शव वहां पहुंचाने के लिए चाबी लेने और बॉक्स में लाश रखने-निकालने की भी कीमत अदा करनी पड़ती है।
झांसी के पोस्टमार्टम हाउस का बुरा हाल है। कई महीनों से यहां पर रखे सभी डीप फ्रीजर खराब चल रहे हैं। प्रचंड गर्मी में कुछ ही देर में शवों से दुर्गंध आने लगती है। ऐसे में मृतक के परिजनों से बर्फ की सिल्ली मंगवाई जा रही है। कई-कई शवों का पोस्टमार्टम 24-24 घंटे बाद होता है। ऐसे में ये सिल्ली कितनी देर चलती होगी? बर्फ घुलने के बाद शवों का क्या हाल होता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरी तरफ इमरजेंसी से पोस्टमार्टम हाउस आते-आते लाश को कई सौदागरों से होकर गुजरना पड़ता है। मंगलवार को अमर उजाला की पड़ताल में लंबे समय से चली आ रही सौदेबाजी उजागर हुई। मोर्चरी में मौजूदा रामसेवक ने बताया कि उनके भाई अनिल की सोमवार को बरुआसागर में हादसे के दौरान मौत हो गई थी। डीप फ्रीजर खराब होने की वजह से उनसे शव को मोर्चरी में रखने के लिए दो बर्फ की सिल्ली मंगवाई गई, जो करीब 900 रुपये में आईं। अनिल के फूफा मनोज ने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस में उनसे 1500 रुपये जमा कराए गए। कहा गया कि पैसे दे दोगे तो जल्दी पोस्टमार्टम करवा देंगे। बरुआसागर में हुए इसी हादसे में जान गंवाने वाले दूसरी व्यक्ति कमलेश के भतीजे कृष्णा ने कई गंभीर आरोप लगाए। बताया कि सोमवार की दोपहर डेढ़ बजे शव लेकर आ गए थे। दो सिल्ली 850 में खरीदकर लाए। 70 रुपये भाड़ा दिया। ईसीजी की जांच की तो 400 रुपये लिए गए। साथ में मौजूद कुलदीप ने बताया कि पोस्टमार्टम से पहले कदम-कदम पर पैसे की मांग की जाती है। डेथ सर्टिफिकेट के 400 रुपये लिए गए। एक ही बॉक्स में दो शव रखे गए। बॉक्स बंद करने वाला व्यक्ति कहने लगा दो सौ रुपये दो। पूछा किस बात के पैसे ले रहे हो। जब फोटो खींचने लगे तो भाग गया। इससे पहले पोस्टमार्टम हाउस की चाबी लेने गया तो सौ रुपये मांगे गए।
स्ट्रेचर से शव लेकर आए कर्मी ने मांगे दो सौ रुपये
सोमवार को ललितपुर में हुए सड़क हादसे के बाद दम तोड़ने वाले मड़ावरा के प्रिंस कुमार के चाचा देशपत ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी से देर रात शव स्ट्रेचर से पोस्टमार्टम हाउस लेकर आए। तब साथ में आए कर्मचारी ने पीएम हाउस के बाहर दो सौ रुपये मांग लिए। उन्होंने कहा कि 14 घंटे तक शव पोस्टमार्टम हाउस में खुले में रखा हुआ है।
एंबुलेंस का भी चल रहा है बड़ा खेल
पोस्टमार्टम हाउस में एंबुलेंस का भी बड़ा खेल चल रहा है। एंबुलेंस चालकों ने अपने इलाके बांट रखे हैं। कौन-कहां रहेगा सब तय है। कुलदीप ने बताया कि एक एंबुलेंस चालक 1200 रुपये में बरुआसागर तक कमलेश और अनिल का शव ले जाने को तैयार था। लेकिन उसकी शर्त थी कि शव को मेडिकल कॉलेज से बाहर ले आओ। अंदर का इलाका किसी दूसरे के पास है। बाद में अंदर का काम देखने वाले एंबुलेंस संचालक ने हर शव के दो-दो हजार लेकर शव भिजवाए। जबकि, दोनों मृतक एक ही इलाके के थे। चाहता तो एक ही एंबुलेंस से भेज सकता था।
कहां-कितना खर्च करना पड़ता
बर्फ (प्रति सिल्ली) 450
ईसीजी कराने पर 400
डेथ सर्टिफिकेट 400
शव के लिए बॉक्स खोलने, बंद करने पर 200
स्ट्रेचर से इमरजेंसी से पीएम हाउस लाने पर 100
चाबी देने पर 100
डीप फ्रीजर ठीक कराने के आदेश दे दिए गए थे। पोस्टमार्टम हाउस में अगर कोई कर्मचारी मृतक के परिजनों से पैसे ले रहा है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बुधवार को ही पूरी टीम को तलब कर पूछताछ होगी। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।
इमरजेंसी में डेथ सर्टिफिकेट और ईसीजी का कोई पैसा नहीं लगता है। अगर किसी ने भी पैसा लिया है तो जांच कराई जाएगी। लोग भी आकर प्रार्थनापत्र देकर शिकायत करें। किसी को भी बक्शा नहीं जाएगा। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।