झांसी। बारिश के बाद से डेंगू का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार को पहला मामला सामने आने के बाद अब जिला अस्पताल में एनएस-1 किट से जांच में डेंगू के पांच नए मरीज मिले हैं। इनमें से ज्यादातर की प्लेटलेट्स भी गिरी हुई थी। चूंकि, जिला अस्पताल की तरफ से एलाइजा जांच के लिए सैंपल मेडिकल कॉलेज नहीं भेजे जा रहे हैं। ऐसे में ये मरीज सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पा रहे हैं।
मौजूदा समय डेंगू का सीजन चल रहा है। अगस्त में हुई झमाझम बरसात के चलते घरों और बाहर पानी का जमाव होने से डेंगू का एडीज मच्छर भी पनप रहा है। बृहस्पतिवार को सरकारी रिकॉर्ड में छनियापुरा की 11 साल की बच्ची डेंगू की पहली मरीज के रूप में दर्ज हुई। वहीं, शनिवार को जिला अस्पताल में पांच मरीजों की एनएस-1 किट से डेंगू की जांच पॉजिटिव आई है। चूंकि, स्वास्थ्य विभाग मेडिकल कॉलेज में होने वाले एलाइजा टेस्ट में डेंगू की रिपोर्ट पॉजिटिव आने को ही मानता है, ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड में शनिवार को कोई भी मरीज दर्ज नहीं हुआ। जो पांच मरीज एनएस-1 जांच में पॉजिटिव आए हैं, उनमें से कइयों की प्लेटलेट्स भी गिरी हुई थी। कुछ मरीजों को अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ा है। वहीं, जिला अस्पताल से डेंगू की जांच कराने में बड़ी खामी सामने आई है। अस्पताल से एलाएजा टेस्ट के लिए सैंपल मेडिकल कॉलेज नहीं भेजे जा रहे हैं। ऐसे में डेंगू की सही हकीकत सामने नहीं आ पा रही है।
ये हैं लक्षण
- तेज बुखार और ठंड लगना
- जोड़ों, मांसपेशियों, आंखों में दर्द
- थकान व ऐंठन
- त्वचा के लाल चकत्ते
- मितली और उल्टी
- नाक से खून आना
- मसूड़ों से खून आना
एलाइजा जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर ही डेंगू का केस दर्ज किया जाता है। जिला अस्पताल हो या फिर प्राइवेट हॉस्पिटल सभी को डेंगू के संदिग्ध मरीज का एलाइजा टेस्ट कराने के लिए सैंपल मेडिकल कॉलेज भेजना जरूरी है। यदि कोई ऐसा नहीं कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। - डॉ. विनोद कुमार यादव, जेडी हेल्थ।