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महंगाई से परेशान किसान, दिनोंदिन बढ़ रही खेती की लागत

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झांसी। बढ़ती महंगाई से किसान परेशान हैं। किसानों की आमदनी दोगुनी करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि खर्च दोगुना हो गया है। मजदूरी हो या फिर डीजल का खर्च या फिर खेतों में डालने के लिए खाद हो, सभी के दाम बढ़ गए हैं। अकेले खेती करना ही महंगा नहीं हो रहा है। साथ ही परिवार को चलाने के लिए भी रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो गई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि किसानों को आमदनी दोगुनी होने का लाभ कैसे मिलेगा। दो साल में खेती की लागत 28.68 प्रतिशत बढ़ गई है।
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दो साल पहले डीएपी 650 रुपये में एक बोरी मिलती थी, लेकिन अब इसके दाम 1200 रुपये हो गए हैं। जो मजदूर 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से काम करते थे, अब 350 से लेकर 400 रुपये प्रतिदिन काम कर रहे हैं। डीजल के दाम दो साल पहले 68 रुपये प्रति लीटर थे, लेकिन अब 95 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। कीटनाशक दवाओं और बीज के दाम भी डेढ़ गुने तक हो गए हैं।
जिले में सिंचाई की सुविधाएं बहुत कम हैं, इसलिए रबी सीजन की फसल में किसानों को सिंचाई के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। बबीना, गुरसराय और गरौठा क्षेत्र में किसान तीन- तीन किलोमीटर दूर से पाइप लाइन डालकर पानी जुटाते हैं। बिजली नहीं मिलती है तो डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ती है और इसमें पांच से छह हजार रुपये एक हेक्टेयर में खर्च हो जाते हैं। फसल पकने पर काटने के लिए मजदूर नहीं मिलते। किसान की मेहनत को ही मजदूरी मान लिया जाए तो सच्चाई यह है कि उसी की लागत नहीं निकल पाती है।
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एक हेक्टेयर फसल पर कुछ ऐसे बढ़ी महंगाई
पहले अब
जुताई बुवाई 9600 10800
बीज 3300 3500
खाद 3850 4300
मजदूरी 4000 7000
सिंचाई 10000 15000
निराई 5000 6000
कीटनाशक 3000 3700
कटाई-मड़ाई 8500 12000
अन्य खर्च 5000 8000
कुल खर्च 52250 70300
कुल बढ़ी लागत- 28.68 फीसदी
आमदनी: 85 हजार रुपये
(आंकड़े: स्केल ऑफ फाइनेंस इन एग्रीकल्चर के मुताबिक)
कड़कड़ाती सर्दियों में सिंचाई करने के लिए खेतों में घुसना पड़ता है। आमदनी दोगुनी करने के नाम पर किसानों से छलावा किया जा रहा है। - पप्पू पाल
खेती करने के बाद जब फसल पकती है तो किसान को खर्चे चुकाने की जल्दी रहती है। लागत निकालना भी कठिन हो जाता है। - हरिदास
सरकार कह रही है कि किसानों की आमदनी दोगुनी कर रहे हैं, लेकिन महंगाई दोगुनी हो रही है। किसान महंगाई से परेशान हैं।- जय सिंह
आमदनी दोगुनी करने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन एक भी किसान आमदनी दोगुनी नहीं हुई है। सब नेताओं की बातें हैं। - अमर सिंह
किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं। उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को जानकारी दी जाती है। फसलों के नुकसान पर मुआवजा दिया जाता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि भी किसानों को दी जा रही है।
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- केके सिंह, उप कृषि निदेशक
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