झांसी। प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को जीका वायरस का सैंपल भेजने को कहा था, लेकिन झांसी जिले में स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक भी सैंपल जांच के लिए नहीं भेजा। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अजीब तर्क दियाहै कि जिले में जीका वायरस के लक्षणों से संबंधित कोई मरीज मिला ही नहीं। ऐसे में सैंपल भेजने का कोई औचित्य नहीं है। जब कोई संदिग्ध मरीज मिलेगा तो सैंपल भेज दिया जाएगा।
दरअसल कानपुर समेत आसपास के इलाकों में जीका वायरस के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। जीका वायरस मुख्य रूप से मच्छरों के काटने से फैलता है, लेकिन कभी-कभी एक गर्भवती महिला से उसके भ्रूण तक, यौन संपर्क के जरिए और ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए भी फैल सकता है। कई बार इसके लक्षण अस्पष्ट होते हैं। शुरूआती लक्षणों में बुखार, रेशेज, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और उल्टी जैसे लक्षण शामिल हैं। जीका वायरस से होने वाला संक्रमण इतना खतरनाक होता है कि अस्पताल में भर्ती होने तक की नौबत आ जाती है। अगर किसी गर्भवती महिला वायरस से संक्रमित हो जाए तो अजन्मे बच्चे में मस्तिष्क दोष पैदा हो सकता है, जिसे माइक्रोसेफेली के रूप में जाना जाता है। इसमें नवजात शिशु का मस्तिष्क और सिर सामान्य से आकार में छोटा होगा। इसके मामले बढ़ने पर शासन ने सभी जिलों को इसका सैंपल जांच कराने के लिए भेजने के निर्देश दिए थे। मगर झांसी से अब तक एक भी सैंपल नहीं भेजा गया है।
इस मामले में सीएमओ डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि कोई भी संदिग्ध मरीज जीका वायरस का सामने नहीं आया है। सभी की जांच में डेंगू, मलेरिया या फिर कोई न कोई मर्ज पकड़ में आ गया। यदि मर्ज पकड़ में आएगा तो जीका का संदिग्ध मानते हुए मरीज की जांच कराई जाएगी।