झांसी। किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म की सनसनीखेज घटना सामने आने के बाद ललितपुर की सियासत में भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने दुष्कर्म के आरोपों से घिरे अपने जिलाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। बसपा ने तो नए जिलाध्यक्ष की ताजपोशी भी कर दी है।
अगले साल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। सभी दल अपनी-अपनी चुनावी तैयारियों को धार देने में जुटे हुए हैं। लेकिन, चुनाव से ठीक पहले ललितपुर के सपा जिलाध्यक्ष तिलक यादव और बसपा जिलाध्यक्ष दीपक अहिरवार का नाम किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात में आ जाने से दोनों ही दलों को गहरा धक्का लगा है। हालांकि, शुरुआत में दोनों ही दल इस मुद्दे को सियासी रंग देने में जुट गई थीं। मुकदमा दर्ज होने के अगले ही सपा और बसपा ने पैदल मार्च निकाला था। इस दौरान भाजपा के इशारे पर सपा और बसपा के नेताओं को फंसाने का आरोप लगाया गया था। लेकिन, दोनों ही पार्टियों के हाईकमान के पास इस पूरे मामले की रिपोर्ट पहुंचने के बाद सपा-बसपा ने आरोपी जिलाध्यक्षों से पल्ला झाड़ लिया है। आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों ही पार्टियां जनता के बीच सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों के दाग लेकर नहीं जाना चाहती हैं। यही वजह है कि मुकदमा दर्ज होने के चार दिन बाद ही सपा और बसपा ने अपने-अपने आरोपी जिलाध्यक्षों से किनारा कर लिया है। बसपा ने इस घटना के एक और आरोपी उपाध्यक्ष नीरज तिवारी को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बसपा के झांसी-चित्रकूट मंडल के मुख्य सेक्टर प्रभारी लालाराम अहिरवार ने बताया कि ललितपुर में बसपा का जिलाध्यक्ष दयाराम अहिरवार को बनाया गया है।
आरोपियों के समर्थन में खड़ी हो गई थी भीड़
झांसी। ललितपुर की एक किशोरी ने इसी सप्ताह मंगलवार को सपा-बसपा जिलाध्यक्ष समेत 28 लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन, दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से मुकदमा दर्ज होने के अगले ही दिन बुधवार को लोगों की भारी भीड़ आरोपियों के समर्थन में सड़कों पर उतर आई थी। सपा और बसपा की ओर से पैदल मार्च निकाले गए थे। दोनों ही दलों के नेताओं ने जज की भूमिका अदा करते हुए घटना को राजनीति से प्रेरित बताया था और अपने नेताओं को निर्दोष करार दे दिया था।
आरोपियों का खंगाला जा रहा आपराधिक इतिहास
झांसी। सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों का पुलिस ने आपराधिक इतिहास खंगालना भी शुरू कर दिया है। पुराने मुकदमों की फाइलों के पन्ने पलटे जा रहे हैं। इसके लिए अलग से टीमें लगाईं गईं हैं। आला अधिकारी खुद पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं। वारदात से जुड़ी हर छोटी-बड़ी गतिविधि की रिपोर्ट ली जा रही है। इसके अलावा पीड़ित पक्ष की सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त किए गए हैं।