झांसी। नोटबंदी के दौरान हेरफेर करने वाले उप डाकपाल (तत्कालीन खजांची)को डाक विभाग ने बर्खास्त कर दिया है। बर्खास्त कर्मचारी पुराने नोट बदलने का हिसाब नहीं दे पाया था। सीबीआई जांच में दोष सिद्ध होने पर विभाग ने ये कड़ा कदम उठाया है।
साल 2016 में हुई नोटबंदी के दौरान आईटीआई निवासी रमेश प्रसाद प्रधान डाकघर में खजांची के पद पर कार्यरत था। रमेश पर नोटबंदी के दौरान लाखों रुपये हेरफेर करने का आरोप लगा था। वह पांच लाख रुपये की पुरानी नकदी बदलने से संबंधित कोई भी कागजात विभाग को नहीं सौंप पाया था। विभागीय स्तर पर हुई जांच में आरोप सही पाए जाने पर डाक सेवा निदेशक ने रमेश प्रसाद को निलंबित कर दिया था। हालांकि, बाद में उसकी बहाली हो गई थी। इसी बीच मामले की सीबीआई जांच शुरू हो गई थी। सीबीआई टीम ने प्रधान डाकघर पहुंचकर नोटबंदी के दौरान के तमाम दस्तावेज खंगाले थे, जिसमें रमेश प्रसाद दोषी पाया गया। सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर डाक विभाग द्वारा उसे बर्खास्त कर दिया है। वर्तमान में ेवह कैंट पोस्ट ऑफिस में उप डाकपाल के पद पर तैनात था।
पहले विभागीय स्तर पर जांच की गई थी, जिसमें दोषी पाए जाने पर रमेश प्रसाद को निलंबित कर दिया गया था। अब सीबीआई जांच में भी वो दोषी पाया गया है। इस पर विभाग ने उसे बर्खास्त कर दिया है। बर्खास्त कर्मचारी नोटबंदी के दौरान पांच लाख रुपये बदले जाने से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया था।
- वीके पांडेय, प्रवर डाक अधीक्षक