झांसी। मंगलवार को राजकीय संग्रहालय में कला संस्कृति मंडल की ओर से पहल बुंदेली कला प्रदर्शनी का का शुभारंभ किया गया। प्रदर्शनी में कई जिलों के चित्रकारों ने चित्रकला के माध्यम से बुंदेली संस्कृति को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रंजना वैशम्पायन ने की।
कार्यक्रम में डॉ. सीमा पांडेय मुख्य अतिथि, वर्षा वामसी, डॉ. सुमन पुनिया, चारु माथुर व डॉ. चांदनी सिंघल विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम का फीता काटकर शुभारंभ करते हुए डॉ. सीमा पांडेय ने कहा कि लोक कलाएं भारतीय समाज की अनुपम विरासत हैं। किसी भी क्षेत्र की सभ्यता एवं सांस्कृतिक विरासत उस क्षेत्र की गरिमा को बढ़ाती है। कहा कि असीम विरासत को अपने अंदर समेटे बुंदेलखंड क्षेत्र कला संस्कृति और साहित्य में हमेशा ही अग्रसर रहा है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. श्वेता पांडेय ने बताया कि प्रदर्शनी में कुल 80 चित्रकारों ने भाग लिया था। जिसमें 50 चित्रकारों की चित्रकला को प्रदर्शनी में लगाया गया है। समिति संरक्षक डॉ. नीति शास्त्री ने कहा कि मंडलायुक्त अजय शंकर पांडेय द्वारा बुंदेली संस्कृति, कला साहित्य और संपदा को संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके लिए ग्यारह समितियों का गठन किया गया है। इस मौके पर ज्वाइंट कमिश्नर मिथलेश सचान, सीडीओ शैलेष कुमार, राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक मुन्ना तिवारी, बीयू के होटल प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रतीक अग्रवाल, जेडीए उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित आदि मौजूद रहे। संचालन शाश्वत सिंह द्वारा किया गया।
पेंटिग को ओरछा के लक्ष्मी नारायण मंदिर में बनाया गया है। जिस पर काफी मेहनत की गई है। इस तरह के आयोजनों से चित्रकारों का मनोबल बढ़ता है। नंदनी सिंह, चित्रकार
चित्रकला के माध्यम से लोक कला और गुसाई मंदिर को दर्शाया गया है। तस्वीरों के माध्यम से गुसाईंयों का इतिहास को दोहराने की कोशिश की गई है। माधवी निराला, चित्रकार
प्रदर्शनी में बुंदेलखंड की चितेरी कला के माध्यम से बुंदेलखंड की संस्कृति को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में शामिल होने पर काफी गर्व हो रहा है। अपूर्वा चतुर्वेदी, चित्रकार
बचपन से ही चित्रकला का शौक है। जिसके चलते चित्रकला में ही भविष्य बनाने की कोशिश कर रहा हूं। प्रदर्शनी में चितेरी शैली के कला का प्रदर्शन किया है। लीलाधर पांडेय, चित्रकार