झांसी। बुंदेलखंड से छुट्टा जानवरों की समस्या के समाधान के लिए गायों और भैंसों की नस्ल सुधारने के लिए कृत्रिम गर्भाधान अभियान चल रहा है। अगस्त से मई तक चलने वाले इस अभियान में जिले के सभी गांवों के तीन लाख चालीस हजार जानवरों को लाभ होगा। अभियान पूरी तरह से निशुल्क चल रहा है।
पूरे बुंदेलखंड में छुट्टा जानवरों की समस्या है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि गायों में एक से डेढ़ लीटर दूध निकलता है। इस कारण गाय पालने वाले इन गायों का खर्चा नहीं उठा पाते हैं और दूध बंद हो जाने के बाद छुट्टा छोड़ देते हैं। छुट्टा जानवरों पर लगाम लगाने तथा बुंदेलखंड में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान योजना चल रही है। इसके अंतर्गत बुंदेलखंड की देशी भैंस की नस्ल हरियाणा की मुर्रा प्रजाति में बदली जा रही है और गायों की नस्ल थारपरकर और हरियाणवी नस्ल में बदली जा रही है। इन नस्लों की गायों और भैंसों में पांच से लेकर 15 लीटर तक दूध निकलता है।
दूध का उत्पादन बढ़ जाने से गाय पालने वालों का रुझान भी इस ओर बढ़ेगा और जानवरों को छुट्टा छोड़ने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी। योजना के फेज तीन में जिले के सभी गांवों को कवर किया जाएगा और एक लाख चालीस हजार गायों व भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा। यह अभियान शुरू हो गया है और 31 मई तक चलेगा। इससे गायों और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कर उनकी नस्ल में सुधार किया जाएगा। अभियान निशुल्क है। इसके लिए पशुपालकों को कोई पैसा नहीं देना है।
बाएफ के सहयोग से चलेगा
राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान योजना के अंतर्गत बाएफ के सहयोग से अभियान चलेगा। इसमें 23 पशु चिकित्साधीक्षक, 26 पशुधन प्रसार अधिकारी और नौ अन्य अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। भारत सरकार की इस योजना के नोडल अधिकारी डॉ. एस के सिंह को बनाया गया है।
राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान योजना के फेज तीन में सभी ग्राम पंचायतों को कवर किया जाएगा। कृत्रिम गर्भाधान मुफ्त कराया जा रहा है। पशुपालक अपने जानवरों की नस्ल को सुधार सकते हैं।
- डा. योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी