झांसी। कागजों में कंपनियां तैयार करके बाजार में नकली दवाएं खपाई जा रही हैं। झांसी और ललितपुर में एंटीबायोटिक की नकली दवाएं मिलने पर जब औषधि विभाग ने पड़ताल की तो इसका खुलासा हुआ। उत्तराखंड से लेकर हिमाचल प्रदेश में निर्माता कंपनी का जो पता लिखा था, वहां पर खाली प्लाट मिला।
औषधि प्रशासन विभाग की छापेमारी के दौरान झांसी और ललितपुर में एंटीबायोटिक दवाओं का सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। दवा में सिफेक्सिम की जितनी मात्रा लिखी थी, उसके सापेक्ष कुछ भी नहीं था। झांसी में मिली दवा पर उत्तराखंड के रुड़की और ललितपुर की दवा पर हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले का पता लिखा हुआ था। तत्कालीन विवेचक उमेश भारती ने बताया कि औषधि विभाग ने दोनों ही जिलों के औषधि निरीक्षक को पत्र लिखकर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। झांसी से भी औषधि निरीक्षक मौके पर गए तो दोनों की कंपनियों के पते पर खाली प्लाट था। आसपास के लोगों ने भी बताया दी कि यहां पर कभी किसी कंपनी का ऑफिस बना ही नहीं। इसके बाद उत्तर प्रदेश के औषधि नियंत्रक ने देश के सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर को पत्र लिखकर दोनों दवाओं की कड़ी निगरानी करते हुए बिक्री पर तत्काल रोक लगाने के लिए कहा है। जहां भी ये दवाएं बिकती मिलेंगी, उन्हें जब्त कर लिया जाएगा।
कोरोना काल में नकली सैनिटाइजर भी खूब खपाया जा चुका
कोरोना काल में झांसी समेत आसपास के जनपदों में नकली सैनिटाइजर भी खूब खपाया गया। औषधि विभाग ने छापेमारी के दौरान दो कंपनियों के नकली सैनिटाइजर पकड़े थे। इस मामले में दोनों कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
बार कोड लगने से रुक जाएगा फर्जीवाड़ा
औषधि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने दवाओं पर बार कोड लगाने के आदेश दिए हैं। अब हर कंपनियों को दवा पर अपना बार कोड लगाना होगा। इसको स्कैन करके देखा जा सकेगा कि दवा असली है या नहीं। ये बार कोड लगने के बाद फर्जीवाड़ा रुक जाएगा।