झांसी। कोरोना के कारण ऑनलाइन संचालित हो रहीं कक्षाओं के कारण बच्चों के लिखने की आदत छूट गई है। ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चे अक्सर गायब रहते थे, अब ऑफलाइन परीक्षाओं का सुन कर बच्चों में सिर दर्द, पेट दर्द, चिड़चिड़ापन होने लगा है। डॉक्टर बताते हैं कि ये समस्या सिर्फ डर की वजह से है।
विगत दो वर्षों से कोरोना के कारण विद्यालय बंद रहे। लेकिन लगातार ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। ऑनलाइन कक्षाओं में अक्सर बच्चे अनुपस्थित पाए जाते थे या फिर कभी क्लास ज्वाइन कर मोबाइल में गेम या कुछ और करने लगते थे। इस सत्र से ऑफलाइन कक्षाएं तो संचालित हो गई, लेकिन फिर भी बहुत से विद्यार्थी ऑनलाइन ही पढ़ते रहे। इस कारण से बच्चों के लिखने की आदत छूट गई। इस बार परीक्षाएं ऑफलाइन संचालित होंगी। इस कारण से बच्चों के मन में डर बैठ गया है।
मनोचिकित्सक यह टिप्स दे रहे गार्जियन को
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अभिभावक क्या करें
- बच्चे से प्यार से बात करें।
- बच्चे को लिखने का अभ्यास करने को कहें।
- पढ़ाई का हौवा न बनाएं
- डाँटे नहीं बच्चे के मनोभाव को समझें
- बच्चों का मोबाइल चलाने का समय सीमित कराएं।
- बच्चों का टाइमटेबल सैट कर दें।
- भोजन बच्चों के साथ ही करें।
बच्चे का क्या करें
- समय से आहार करें।
- समय पर सोना शुरू करें।
- मोबाइल का इस्तेमाल कम करें।
- लिखने का अभ्यास करें।
- पाठ्यक्रम का टाइमटेबल बना लें।
- स्कूल जाना शुरू करें।
- मोबाइल से कम किताबों से ज्यादा पढ़ें।
ऑनलाइन कक्षाओं के कारण बच्चों का शिक्षकों से किसी प्रकार का कोई तालमेल नहीं बन पाया है। अब ऑफलाइन कक्षाओं का सुनकर बच्चों के मन में डर बैठ गया है। दो वर्षों से बच्चों का अनुशासन और दिनचर्या बदल चुकी थी। सोना-जागना, पढ़ना-लिखना एकदम से सब बदल गया है जिसके कारण बच्चे ऐसे हो रहे हैं। - मनोचिकित्सक, डॉ. शिफाका जाफरीन