झांसी। बुंदेलखंड की हस्त शिल्प को संरक्षित किया जाएगा, जिसके जरिये रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे। इसके लिए मंडलायुक्त की पहल पर अलग से समिति का गठन होगा। रविवार को हुई बैठक में इसकी रूपरेखा तय की गई।
बैठक में मंडलायुक्त डा. अजय शंकर पांडेय ने कहा कि हस्तकला एक ऐसी विधा है, जिसमें सिर्फ हाथ या सरल औजारों के जरिये कलात्मक कार्य किए जाते हैं। भारत हस्तशिल्प का सर्वोत्कृष्ट केंद्र माना जाता है। यहां दैनिक जीवन की सामान्य वस्तुएं भी कलात्मक रूप से गढ़ी जाती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए बुंदेलखंड में हस्तशिल्प व लघु उद्योग धंधों के उन्नयन व संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए हस्तशिल्प एवं उद्योग धंधों की समिति का गठन किया जाएगा।
इस मौके पर जेडीए उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित, डा. नीति शास्त्री, डा. डीके भट्ट, धीरज खुल्लर, कामिनी बघेल, प्रदीप प्रजापति, इंदु शर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन सिफ्सा के मंडलीय परियोजना प्रबंधक आनंद चौबे ने किया।
ये किए जाएंगे काम
झांसी। हस्तशिल्प व लघु उद्योग धंधों के विकास के लिए डायरेक्टरी का प्रकाशन होगा। एक जनपद एक उत्पाद की प्रगति का मूल्यांकन होगा, आवश्यकतानुसार उत्पाद परिवर्तन का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। प्रोसेसिंग यूनिटों की स्थापना की संभावना तलाशी जाएगी। ललितपुर के जखौरा में पीतल बर्तन /स्मृति चिह्न के कारोबार को स्केलअप किया जाएगा। रानीपुर कपड़ा उद्योग की समस्याओं और संभावनाओं की जानकारी संकलित की जाएगी। हस्तशिल्प व कुटीर उद्योग से जुड़े लोगों को श्रम विभाग की योजनाओं से जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा। शिल्पियों के उत्पाद के लिए प्रदर्शनी व मेले आयोजित किए जाएंगे।