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दिमाग की टीबी हो तो इलाज में नहीं बरतें लापरवाही

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झांसी। फेफड़ों के अलावा भी टीबी कई प्रकार की होती है। इसमें से ही एक होती है दिमाग की टीबी। ऐसे तो दिमाग की टीबी एक-दूसरे से नहीं फैलती लेकिन, जब फेफड़ों की टीबी से संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता है तो उसके मुंह से निकली बूंदे दूसरे व्यक्ति के अंदर प्रवेश कर जाती हैं। ये बूंदे यदि दिमाग में प्रवेश कर जाती है तो व्यक्ति के दिमाग में टीबी या ब्रेन टीबी होने की संभावना होती है।
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टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो ट्यूबरक्युलोसिस बैक्टीरिया के कारण होती है। इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव फेफड़ों पर होता है। मगर टीबी कई प्रकार की होती है, जैसे कि ब्रेन, आंख, आंत, जननांग, रीढ़ की हड्डी आदि। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि ब्रेन टीबी एक खतरनाक बीमारी है। यह हमारे दिमाग को प्रभावित करती है। धीरे-धीरे टीबी के जीवाणु दिमाग में प्रवेश कर गांठ बना लेते हैं। ये गांठ बाद में टीबी का रूप ले लेती है, जिससे दिमाग की झिल्लियों में सूजन या गांठ पड़ जाती है। इसे मेनिनजाइटिस ट्यूबरक्लोसिस, मेनिनजाइटिस या ब्रेन टीबी भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इसके बारे में पता लगते ही व्यक्ति को इसे तुरंत दिखा लेना चाहिए, क्योंकि इसमें लापरवाही से जान का खतरा हो सकता है। इसके उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में दिखाया जा सकता है।
ये हैं लक्षण
ब्रेन टीबी के लक्षण शरीर में धीरे-धीरे उबरते हैं। शुरुआत में बेहोशी, चक्कर आना, सिर दर्द बने रहने के साथ थकान, कम तीव्रता का बुखार, उल्टी, चिड़चिड़ापन और आलस जैसी समस्याएं सामने आती हैं। दिनोंदिन ये लक्षण और भी ज्यादा खतरनाक होते जाते हैं।
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ऐसे कराएं जांच
जैसे ही मरीज को ब्रेन टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं, उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ब्रेन टीबी में लापरवाही मरीज के लिए घातक हो सकती है। इसका पता एक्सरे, एमआरआई, सिटी स्कैन, सीबी नेट और सीएसए जांच से लगाया जा सकता है।
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