झांसी। उत्तर मध्य रेलवे के झांसी, आगरा व प्रयागराज मंडल में ई टिकट की कालाबाजारी नहीं थम रही है। पिछले चार में तीनों मंडलों में 37 लोगों को अनाधिकृत रूप से ई टिकट बनाते पकड़ा गया। ऐसे कारोबारी आरपीएफ के रडार पर चल रहे हैं। लगातार इनकी सूचनाएं एकत्रित की जा रहीं हैं।
रेलवे के 65 फीसदी टिकटों की बुकिंग इंटरनेट के जरिए होने लगी है। ऐसे में अनाधिकृत रूप से टिकट बनाने वालों का कारोबार भी खूब फल फूल रहा है। विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर दलालों द्वारा हजारों से लेकर लाखों रुपये के टिकट बनाने के मामलों का खुलासा होने के बाद रेलवे सतर्क है। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) और रेलवे ई टिकटों की लगातार गोपनीय तरीके से निगरानी कर रहा है। पता किया जा रहा है कि कहां-कहां लोग इस तरह का काम कर रहे हैं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर आरपीएफ ने अप्रैल से जुलाई के बीच 37 लोगों को अनाधिकृत रूप से ई टिकट बनाते पकड़ा, जिनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई।
एजेंट के लिए जरूरी है प्रमाणपत्र
रेलवे से मान्यता प्राप्त एजेंट अपने नीचे सब एजेंट बना सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी एजेंट्स की भी समय-समय पर जांच की जाती है। एजेंट्स के लिए उनके कार्यालय पर बोर्ड लगाना और खिड़की के सामने ही ऐसे स्थान पर सर्टिफिकेट लगाना जरूरी किया गया है, जहां से वह आम आदमी को दिखाई दे। अगर किसी एजेंट के पास ये दोनों चीजें नहीं हैं तो उससे टिकट बुक न कराएं और अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन पर सूचना दें।