झांसी। बरुआसागर निवासी व्यापारी अरविंद गुप्ता कर्जे से परेशान होकर हैदाराबाद भाग गया था। पुलिस ने उसे बरामद कर लिया है। पुलिस की पूछताछ में उसने कबूला कि गायब होने से पहले मेडिकल अस्पताल के पास उसकी अजय सोनी से मुलाकात हुई थी। घर और पुलिस की गतिविधियों के बारे में जानने के लिए उसने अजय को मोबाइल और सिम दिलवाया था। पुलिस ने उसके पास से नए फोन की रसीद भी बरामद की है।
बरुआसागर के मिलान मुहल्ला निवासी अरविंद गुप्ता मेडिकल अस्पताल के पास से 23 सितंबर को अचानक गायब हो गया था। उसकी पत्नी मुनन गुप्ता ने अपहरण का आरोप लगाते हुए नवाबाद थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया। उसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी। फोन सर्विलांस पर लगाए गए। अरविंद पहले यहां से सागर गया। उसके बाद पुरी (उड़ीसा) पहुंच गया। इसके बाद वह हैदराबाद निकल गया। पुलिस की टीम उसके पीछे लग गई। पुलिस को मालूम चला था कि पिछली बार भी घर से गायब होने के बाद वह हैदराबाद गया था। पिछले पांच दिन से वह हैदराबाद में अपने परिचित के घर था। उसका सटीक ठिकाना मालूम चलने पर पुलिस टीम ने उसे वहां ट्रेस कर लिया। मंगलवार को उसे झांसी लाया गया।
सबसे पहले पुलिस उसे लेकर नवाबाद थाने पहुंची। यहां पुलिस ने उससे पूछताछ की। अरविंद ने पुलिस को बताया कि उसने कर्ज लेकर दो डंपर निकलवाए थे लेकिन, उनकी किस्त नहीं चुका पा रहा था। इस वजह से कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था। बेटियों के शादी का भी दबाव था। कर्ज चुकाने से बचने के लिए वह खुद घर से चला गया था।
सीओ सिटी राजेश सिंह के मुताबिक अरविंद ने पूछताछ में बताया कि 23 सितंबर को उसकी अजय सोनी से मेडिकल अस्पताल के पास मुलाकात हुई थी। उसने दो मोबाइल एवं तीन सिम खरीदे। एक मोबाइल फोन और सिम उसने अजय को दे दिया। उसने अजय से कहा कि पंद्रह दिन के बाद वह फोन करके परिवार एवं पुलिस के बारे में पूछता रहेगा। गायब होने से पहले अरविंद ने आखिरी काल अजय को की थी। सीओ का कहना है पूछताछ के बाद अरविंद को उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया।
व्यवसायी अरविंद के गायब होने के बाद अजय सोनी का नाम व्यवसायी के परिजनों ने भी नहीं लिया लेकिन, टैक्सी ड्राइवर के फोन पर हुई एक कॉल ने अजय को फंसा दिया। पुलिस की पड़ताल में टैक्सी ड्राइवर ने अजय का नाम बता दिया। इसके बाद पूरा मामला दूसरी ओर घूम गया। पूछताछ के लिए अजय को थाने बुलवाया गया लेकिन, पुलिस की पिटाई के चलते अजय ने इलाइट चौकी के भीतर आत्महत्या करने की कोशिश की। इस मामले में तत्कालीन नवाबाद थानाध्यक्ष विजय पांडेेय समेत दो सिपाही निलंबित कर दिए गए। वहीं, अजय की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।