बीएएमएस: तीन साल से चल रहा नंबर बढ़ाने का खेल!
झांसी। बीएएमएस छात्रों के नंबर बढ़ाने के मामले में एक और खुलासा हुआ है। बीयू को दी गई गोपनीय सूचना में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया गया है कि नंबर बढ़ाने का खेल नया नहीं है। पिछले तीन साल से एक कॉलेज इस फर्जीवाड़े में शामिल है। ऐसे में बीयू पिछले साल की कॉपियों की भी जांच करा सकता है।
बुंदेलखंड के आयुर्वेदिक कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के नंबर बढ़ाने के खेल में परत-दर-परत नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इस फर्जीवाड़े का खुलासा बीयू को मिली गोपनीय शिकायत के बाद हुआ है। शिकायतकर्ता ने ये भी आरोप लगाया है कि एक आयुर्वेदिक कॉलेज पिछले तीन साल यानि की सत्र 2018-19 से फर्जीवाड़ा कर रहा है। इसके लिए हर छात्र से 50-50 हजार रुपये लिए गए। शिकायत मिलने के बाद अब बीयू प्रशासन पुरानी उत्तर पुस्तिकाओं को भी निकलवाने पर विचार कर रहा है। जानकारों ने बताया कि विश्वविद्यालय के पास एक साल की कॉपियों का रिकॉर्ड रहता है। फिर उसे हटा दिया जाता है। हालांकि, बीयू प्रशासन ने सत्र 2019-20 की कॉपियों को हटाने के आदेश दे दिए हैं, मगर उत्तर पुस्तिकाएं अभी भी बीयू के पास ही हैं। ऐसे में बीयू प्रशासन इनको हटाने के आदेश पर रोक लगाकर जांच कराने पर विचार कर रहा है।
ये है मामला
बीयू में जांच में बीएएमएस के छात्रों की 500 कॉपियों के पहले पन्ने पर हैश टैग का चिह्न मिला है। बीयू अधिकारियों का भी कहना है कि प्रथम दृष्टया ही ये स्पष्ट हो गया है कि ये चिह्न नंबर बढ़ाने के लिए डाला गया। इन छात्रों की कॉपियों में भी दूसरे विद्यार्थियों की तुलना में औसत से ज्यादा अंक दिए गए हैं। ये शिकायत परीक्षा से पहले मिली। तब बीयू प्रशासन ने इसे गोपनीय रखा और मूल्यांकन तक का इंतजार किया। इसके बाद जून में कराई जांच में 15 फीसदी कॉपियों में एक सा चिह्न मिला।
आज गठित होगी जांच समिति
हैश टैग प्रकरण की जांच के लिए विश्वविद्यालय सोमवार को तीन सदस्यीय कमेटी का गठन करेगा। चूंकि, बीयू में कई वरिष्ठ शिक्षकों का जांच का रिकॉर्ड ठीक नहीं है, वो सालों से जांचें दबाए बैठे हैं। ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि कौन इस कमेटी में शामिल किया जाता है। जानकारों का कहना है कि अगर बीयू किसी प्रशासनिक अथवा न्यायिक अधिकारी या बाहरी व्यक्ति को समिति में शामिल करे तो निष्पक्षता से जांच हो सकेगी।