झांसी। जिले में पीसीएफ, सहकारी समितियों और बफर स्टाक में तीन हजार मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। डेढ़ हजार मीट्रिक टन की एक रैक आ गई है। इसलिए जिले में खाद की कमी नहीं है। सहकारिता विभाग अब तक लक्ष्य से दोगुनी डीएपी बांट चुका है।
पिछले साल कम बारिश होने के कारण कई गांवों में खेत खाली पड़े रहे थे और बुवाई नहीं हुई थी, जबकि इस बार अच्छी बारिश हो जाने के कारण रबी सीजन में किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ गई है, इसलिए हर किसान अपने खेतों में बुवाई करना चाह रहा है। बारिश 700 मिमी हो जाने के कारण खेतों के आसपास के ताल-तलैया भर गए हैं। ऐसे में किसानों को लगता है कि यदि जल्दी बुवाई कर दी तो अच्छी पैदावार होगी।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अनूप कुमार द्विवेदी ने बताया कि अक्तूबर के अंत तक शासन ने जिले में 2009 मीट्रिक टन डीएपी वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। जबकि, अक्तूबर अभी समाप्त नहीं हुआ और 4512 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण हो चुका है। वर्तमान में जिले में पीसीएफ, सहकारी समितियों और बफर स्टाक में तीन हजार मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। किसानों के लिए उर्वरक की कोई समस्या नहीं है। जिले में जहां कहीं पर भी सहकारी समिति के कर्मचारियों द्वारा गड़बड़ी बरती जाने की शिकायत आएगी, तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
उधर, जिला कृषि अधिकारी के के सिंह ने बताया कि जिले में 1500 मीट्रिक टन डीएपी की एक रैक और आ गई है। 5400 मीट्रिक टन डीएपी ललितपुर भेजी जा चुकी है। इसलिए डीएपी का पर्याप्त स्टाक है। चार दिन बाद 2600 मीट्रिक टन डीएपी की एक रैक और आ जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी गांवों के किसान अपने खेतों में दलहनी फसलें उगाना चाह रहे हैं, इसलिए किसान खाद लेना चाह रहे हैं, ताकि बुवाई में दिक्कत न हो।