बिजली विभाग का नया थाना खुलने के बाद से लगातार चोरों पर शिकंजा कसता जा रहा है। पिछले 60 दिन में थाने में 389 लोगों के खिलाफ बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इनमें 35 लोगों ने शमन शुल्क जमा कर दिया। जबकि, बाकी मामलों की विवेचना चल रही है। हालांकि, थाना खुलने के बाद से लोगों को दूसरे थानों की पुलिस ने परेशान करना बंद कर दिया है।
अभी तक किसी भी तरह की चोरी पकड़ने पर पहले थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाती थी। इसके बाद अगर संबंधित व्यक्ति को पुलिस कार्रवाई से बचना है तो वह विभाग में जाकर शमन शुल्क और राजस्व निर्धारण एक साथ जमा करें। इसके बाद विभाग राजस्व जमा होने का एक पत्र लिखकर देगा, जिसके आधार पर ही पुलिस कार्रवाई से बचा जा सकता था। खासकर सीधे चोरी में लगने वाली धारा 135 में लोग ज्यादा परेशान होते थे। ऐसे मामलों में पुलिस भी लोगों को परेशान करने से नहीं चूकती थी।
पुलिस लोगों में डर बनाती थी कि शमन शुल्क जमा करने से कुछ नहीं होता है। मामला को अब न्यायालय में ही निपटेगा। साथ ही, कई मामलों में विभाग के अधिकारियों को भी रिपोर्ट लिखाने के लिए चक्कर लगाने पड़ते थे। इन्हीं सब समस्याओं को दूर करने के लिए विगत 19 सितंबर को सीपरी बाजार खालसा सबस्टेशन के बगल में खाली पड़े विभाग के भवन में विद्युत चोरी निरोधक पुलिस थाना दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का कार्यालय खोल दिया गया था। अभी तक बिजली अधिकारी और विजिलेंस द्वारा पूरे जनपद में की गई चेकिंग के बाद 389 एफआईआर दर्ज कराईं जा चुकीं हैं। मालूम हो कि थाने में अभी तीन उपनिरीक्षक, चार हेड कांस्टेबल और चार कांस्टेबल तैनात हैं।
पिछले दो माह में थाने में 389 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें 35 लोग शमन शुल्क जमा करा चुके हैं, जिनका मामला खत्म कर दिया गया है। बाकी की विवेचना चल रही है।
गनेश कुमार सिंह, थाना प्रभारी।
ज्यादातर ऐसे आते हैं मामले
- बिना कनेक्शन घर मेें कटिया डालकर बिजली चोरी
- बकाये पर कनेक्शन कटने के बाद फिर जोड़ लेना
- मीटर के पहले कट लगाकर।
- मीटर में कारस्तानी कर।
- चोरी की बिजली से सिंचाई की मोटर चलाना।
- घरेलू बिजली कनेक्शन व्यावसायिक इस्तेमाल।
ये है कानून
- बिजली चोरी करते पाए जाने पर अगर अब तय शमन शुल्क जमा नहीं करते हैं तो तीन माह से सात साल तक ही सजा हो सकती है।
- धारा 135 विद्युत अधिनियम: कटिया डालकर, घरेलू बिजली का व्यावसायिक इस्तेमाल।
- धारा 136 विद्युत अधिनियम: बिजली के सरकारी उपकरणों को नुकसान पहुंचाना।
- धारा 137 विद्युत अधिनियम: विद्युत चोरी का सामान बरामद होने पर।
- धारा 138 विद्युत अधिनियत: मीटर से छेड़छाड़, काटे गए कनेक्शन को फिर जोड़ना।
- धारा 139 विद्युत अधिनियम: बिजली की बर्बादी करने जैसे मामलों में।
- धारा 140 विद्युत अधिनियम: बिजली के तार और अन्य उपकरण चोरी के मामले।
दो- दो करोड़ रुपये बढ़ाया लक्ष्य
अभी शहर के तीनों वितरण खंडों का 12- 12 करोड़ लक्ष्य है। मगर, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने इस लक्ष्य को दो- दो करोड़ रुपये और बढ़ा दिया है। साथ ही, विजिलेंस को एक महीने में 200 किलोवाट तक चोरी पकड़ने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए अधिकारियों से अधिक से अधिक चेकिंग करने, बकायेदारों से बकाया वसूलने, कटे कनेक्शन के उपभोक्ताओं से वसूली करने पर जोर देने को कहा है।