झांसी। रेल पटरियों के 21 स्थान सुसाइड प्वाइंट बन गए हैं। इन स्थानों पर पिछले तीन साल में दो सौ लोग ट्रेन से कटकर अपनी जान दे चुके हैं। इनमें सबसे अधिक लोगों ने दिल्ली मुंबई मुख्य ट्रैक पर पुलिया नंबर नौ के निकट आत्महत्याएं कीं। इस स्थान पर ही 40 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अन्य स्थान झांसी के आसपास स्टेशनों के शामिल हैं।
अगस्त 2018 से अगस्त 2021 की अवधि में रेलवे स्टेशन, पटरियों व ट्रेनों में 432 शव पाए गए। इनमें 82 मृतक रेलवे पुलिस की फाइलों में अज्ञात के रूप में दर्ज हैं, जिनकी आज तक शिनाख्त नहीं हो सकी है। मृतकों में 200 लोगों की ट्रेन से कटकर मौत हुई, जबकि बीस की ट्रेन से गिरकर। जिन लोगों ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दी, उनमें अधिकांश ऐसे स्थान थे जहां पहले भी लोग खुदकुशी कर चुके हैं। इनमें पुलिया नंबर नौ, ग्वालियर रोड व दतिया गेट क्रासिंग के पास, आईटीआई के अलावा करारी, बबीना, दतिया, डबरा, पारीछा, चिरगांव, मोंठ, नंदखास, उरई, मऊरानीपुर, ललितपुर, तालबेहट, जाखलौन, महोबा स्टेशन के पास के क्रासिंग गेट पर सबसे अधिक लोगों ने आकर आत्महत्या की। इनमें अधिकांश जगह आबादी के आसपास है।
- रेलवे क्षेत्र में जो अज्ञात शव मिलते हैं उनकी पहचान के लिए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। कुछ नए कदम उठाए जा रहे हैं, जिनके लिए संबंधित थाना प्रभारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
मोहम्मद इमरान, एसपी रेलवे।
शिनाख्त के लिए यह उठाए जा रहे कदम
जीआरपी शव का पंचनामा भरने से पूर्व अब मूल दशा की फोटो व वीडियो बना रही है। यदि शव सवारी ट्रेन में प्राप्त होता है तो उस बोगी में ठीक से निरीक्षण कर भौतिक साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। कोच में बैठे आसपास बैठे यात्रियों से पूछताछ की जा रही है। मृतक के पास कोई सामान मिलता है तो उसके पंफ्लेट छपवाकर शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम बुलाकर जांच करवाई जा रही है। अगर टिकट मिलता है तो संबंधित स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज भी देखे जा रहे हैं। ताकि शव की पहचान करने में ज्यादा से ज्यादा मदद मिल सके।
एक वर्ष तक रखा जाता है सामान
मृतकों के पास मिलने वाली नकदी व सामान को एक वर्ष तक मालखाने में सुरक्षित रखा जाता है। प्रत्येक मृतक की शिनाख्त के लिए छह जांचें चलती हैं, इसके बाद अंतिम रिपोर्ट लगाकर फाइल को बंद कर दिया जाता है। शिनाख्त न होने पर हर वर्ष सामान को निष्प्रोज्य घोषित कर दिया जाता है। मृतक के पास जो नकदी मिलती है, उसे सरकारी खजाने में जमा करा दिया जाता है।