कर्मचारी संगठनों की हड़ताल को देखते हुए शासन सजग हो गया है। विभिन्न संगठनों ने 25 से 27 अक्तूबर तक हड़ताल करने की चेतावनी दी है। इस पर प्रदेश के मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद पांडेय ने मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को भेजे पत्र में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक लगा दी है। यदि कर्मचारी धरना प्रदर्शन या हड़ताल के कारण काम नहीं करते हैं तो उन्हें वेतन नहीं देने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने पत्र में कहा कि अग्रिम आदेश तक अवकाश मांगने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का अवकाश स्वीकृत न किया जाए। कार्यालय आने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा दी जाए। यदि कोई उनके कार्य में व्यवधान डालता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कार्य बहिष्कार या हड़ताल की स्थिति में विभाग से संबंधित अत्यावश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। जो अधिकारी और कर्मचारी काम पर आना चाहता है, उन्हें रोका न जा सके, सरकारी संपत्ति को यदि कोई नुकसान पहुंचाता है तो उसे कड़ाई से रोका जाए।
द्वार सभा में गरजे कर्मचारी
उप्र चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ की सातवीं द्वार सभा विकास भवन में हुई। रहीस सिद्दीकी ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पर लगी रोक हटाई जाए। यदि सरकार नहीं चेती तो 2019 के लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
अन्य वक्ताओं ने भी सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों की आलोचना की। इस मौके पर रवि कुमार, रामस्वरूप भारती, सीताराम पाल, प्रदीप करौसिया, काशीराम, राम सिंह, मौजी लाल, अशोक सिंह, बाबूलाल पाल, रमेश यादव, अशोक तिवारी, राम सिंह, राजकुमार, जीतू कागरे मौजूद रहे।