झांसी। कोरोना की वैक्सीन लगवाने वालों में 10 महीने बाद भी अच्छी खासी एंटीबॉडी मिल रही है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हुई डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और सामान्य लोगों की जांच में इसकी पुष्टि हुई है। ऐसे में कोरोना की चपेट में आ जाने के बाद भी इनके गंभीर होने की आशंका कम है।
कोरोना की वैक्सीन लगवाने वाले 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और फ्रंट लाइन वर्कर्स के लिए बूस्टर डोज लगनी शुरू हो गई है। दूसरी डोज लगने के नौ महीने बाद ही कोविड की तीसरी वैक्सीन लगवा सकते हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज की जांच में नौ महीने से भी ज्यादा समय तक शरीर में एंटीबॉडी होने की बात सामने आई है। मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक सिंह ने बताया कि पिछले आठ महीनों में लगभग 150 लोगों की एंटीबॉडी की जांच हुई है। इसमें कई फ्रंट लाइन वर्कर्स भी हैं, जिन्हें जनवरी में पहली और फरवरी में दूसरी वैक्सीन लग गई थी। इनकी एंटीबॉडी की जांच में सामने आया है कि सवा दस महीने तक भी कइयों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी मिली है। उन्होंने बताया कि यदि 50 एयू प्रति एमएल से कम रिपोर्ट आती है तो माना जाता है कि व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी नहीं है। अब तक हुई जांच में अधिकतर लोगों में 75 से 100 एयू प्रति एमएल एंटीबॉडी सामने आई है। कई लोगों में 100 से 150 एयू प्रति एमएल भी एंटीबॉडी मिली है।
प्लाज्मा थेरेपी के समय हुई काफी जांच, एक थमी
कोविड की दूसरी लहर में प्लाज्मा थेरेपी को जब तक मंजूरी मिली हुई थी, तब तक रोजाना दो से तीन लोग एंटीबॉडी की जांच कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आते थे। अब डॉक्टर के परामर्श के बाद ही कॉलेज में एंटीबॉडी की जांच हो रही है।