खुटहन। क्षेत्र के दरबारे कादरिया गौसपीर दरगाह का फाटक 16 नवंबर की रात 11 बजकर 11 मिनट पर खुल जाएगा। इसी के साथ यहां का सालाना उर्स(मेला) भी शुरू हो जाएगा, जो 23 नवंबर तक चलेगा। उर्स प्रत्येक वर्ष रबी उस्मानी की ग्यारवें से शुरू होकर 17 दिनों तक चलता है। यहां जनपद के अतिरिक्त, प्रदेश व देश के अन्य प्रान्तों से हजारों जायरीन मत्था टेकने आते हैं।
दरगाह समिति के मुतवल्ली मोहम्मद मंसूर शाह ने बताया कि मेले की तैयारियां अंतिम चरण में है। 15 नवंबर को 9 बजे सुबह कलश चढ़ेगा। 16 नवंबर की रात में फाटक खुलने का बाद उर्स शुरू हो जाएगा, जो 23 नवंबर तक चलेगा। जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर पश्चिम दिशा में गौसपुर गॉव स्थित गौसपीर दरगाह के विषय में कहते हैं कि शाह मोहम्मद उमर तथा शाह नगीना दोनों भाई लगभग आठ सौ वर्ष पूर्व जियारत के लिए बगदाद शरीफ गये थे, जहां से उन दोनों ने एक ईंट लाई थी। गौसपुर में रात्रि विश्राम के समय स्वप्न आया कि ईंट को इसी जगह एक रौजा की तामीर करके नस्ब कर दिया जाय। ताकि इस जमीन पर भी बगदाद शरीफ की तरह गौसपाक फैज का चश्मा जारी रहे। यही पाक ईंट दरगाह की गुंबद के भीतर छोटे से कुब्बे में नस्ब है। इसी कुब्बे का फाटक रबी उस्मानी की ग्यारहवें की रात जायरीनों को मत्था टेकने के लिए खोला जाता है।