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फाइलेरिया उन्मूलन के लिए घर- घर दी जाएगी दवा

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फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जिले में नवंबर में अभियान शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए सघन अभियान चलाकर घर-घर दवा खिलाई जाएगी। शासन स्तर से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम का वर्चुअल शुभारंभ कर दिया गया है।
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फाइलेरिया को गांव की भाषा में हाथीपांव भी कहा जाता है। यह एक घातक रोग है, जो मच्छर काटने से फैलता है। फाइलेरिया के संक्रमण से सभी को खतरा है। इसके उन्मूलन के लिए चरणबद्ध तरीके से एमडीए अभियान चलाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। अभियान से पहले जिले में ग्रामीण क्षेत्र के 4000 की आबादी पर कराए गए सर्वे में फाइलेरिया के दो मरीज मिले हैं। इसमें एक बदलापुर और दूसरा सदर तहसील क्षेत्र का मरीज है। जिला मलेरिया अधिकारी डा. बीपी सिंह का कहना है कि दोनों मरीजों का इलाज चल रहा है। फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक दिव्यांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। अगर इसका इलाज नहीं किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। जिससे मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे बचाव के लिए पांच साल तक दवा दी जाती है। साल में एक बार दवा की खुराक दी जाती है। नवंबर में शुरू हो रहे अभियान के दौरान कोविड-19 के मानकों का पालन करते हुए घर-घर जाकर नि:शुल्क दवा खिलाई जाएगी। दो साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को छोड़कर, सभी को स्वास्थ्य कर्मी अपने सामने एमडीए दवाओं का सेवन कराएंगे। दस दिन तक चलने वाले इस अभियान की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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