पूर्वांचल विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह के दौरान महंत अवैद्य नाथ संगोष्ठी भवन में कवि सम्मलेन का आयोजन रविवार की रात किया गया। इस दौरान कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं।
विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा, संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जनसंचार विभाग एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन की शुरूआत सरस्वती वंदना से हुई। इस दौरान अलीगढ़ के कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने तपती हुई जमीन है जलधार बांटता हूं, पतझड़ के रास्ते पर मैं बहार बांटता हूं... सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इंदौर से आईं डॉ. भुवन मोहिनी ने जय हो शक्ति भगवती अग्निवती मधुमति.. सुना कर बेटियों का मान बढ़ाया। प्रयागराज के अखिलेश द्विवेदी ने अपनी हास्य कविताओं से लोगों को खूब ठहाके लगवाएं। वाराणसी के वरिष्ठ कवि हरिराम द्विवेदी ने गीत, छंद और मुक्तक की प्रस्तुति की। भरतपुर से भगवानदास मकरंद ने अपनी रचना ठोको ताली, वाह-वाह करते करते एक दिन क्या पता था ऐसी उठापटक मचाएंगे... प्रस्तुत की। वाराणसी के अभिनव अरुण हिंदी और उर्दू से मोहब्बत जुबां हिंदुस्तानी बोलता हूं.. सुनाया। अयोध्या के डॉ. श्रवण कुमार ने सुनाया कि कुछ बातें जो बिना कहे ही महसूस की जाती है, कुछ यादें जो सीधे लोगों के दिल में उतर जाती हैं... ।
जौनपुर के सभाजीत द्विवेदी ने जब भी हम करें एकता की बात करें ...सुनाकर सौहार्द की अपील की। इससे पहले मुख्य अतिथि आवास एवं शहरी नियोजन राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद पूर्वांचल विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। यहां से निकले छात्र पूरे देश में जिले का मान बढ़ा रहे है। विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने देवी गीत प्रस्तुत किया। कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने अतिथियों का स्वागत किया। जयपुर के अशोक चारण ने कवि सम्मेलन का संचालन किया। संयोजक डॉ. मनोज मिश्र ने संचालन किया। इस मौके पर पीएनबी वाराणसी मंडल प्रमुख राजेश कुमार, राम बहादुर, वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसके पांडेय, एफओ संजय राय, कुलसचिव महेंद्र कुमार, परीक्षा नियंता बीएन सिंह, प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. वंदना राय, डा. बीडी शर्मा, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. अशोक श्रीवास्तव, प्रो. देवराज सिंह, डॉ. विजय सिंह, डॉ. विजय प्रताप तिवारी, डॉ. राजकुमार, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. सुनील कुमार उपस्थित रहे।