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बुधादित्य योग के चलते धनतेरस पर्व हुआ विशेष .. ...

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धनतेरस के चलते बाजार गुलजार हो रहे है। वहीं, ज्योतिष शास्त्र के जानकार इस वर्ष धनतेरस पर्व को विशेष लाभकारी बता रहे हैं। उनका कहना है कि इस दिन भोग एवं ऐश्वर्य का प्रदाता शुक्र की राशि तुला में सूर्य, मंगल और बुध ग्रह गोचर करेंगे। बुध को ज्योतिष विज्ञान में व्यापार और बुद्धि का कारक ग्रह माना जाता है। बुध और मंगल मिलकर धन योग का निर्माण करते हैं, वहीं सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य योग का निर्माण होगा। इस योग को राजयोग की श्रेणी में भी रखा गया है। यह योग तुला राशि में बन रहा है, जो व्यापार की कारक राशि मानी जाती है।
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ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ शैलेश मोदनवाल बताते हैं कि ग्रहों के विशेष गोचर के कारण धनतेरस पर्व विशेष लाभकारी होगा। इस दिन भोग एवं ऐश्वर्य का प्रदाता शुक्र की राशि तुला में सूर्य, मंगल और बुध ग्रह गोचर करेंगे। बुध को ज्योतिष विज्ञान में व्यापार और बुद्धि का कारक ग्रह माना जाता है। कारोबारी इस दिन निवेश करके या नयी योजनाओं को लागू करके आने वाले समय में आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।
ज्योतिष एवं वास्तु आचार्य डॉ टीपी त्रिपाठी ने कहा कि इस वर्ष धनतेरस पर्व का सुखद संयोग उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और वैधृति योग में है। यह पर्व दो नवंबर मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन में 8-35 बजे के बाद त्रयोदशी मिलेगी। रात्रि 6 बजे से 7-57 बजे तक वृष लग्न में लक्ष्मी, कुबेर व धनवंतरी की पूजा करना फलदायी होगा। इस दिन झाड़ू खरीदना लाभदायी है। कर्मकांड विशारद पं मुरारी श्याम पांडेय ने कहा कि ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन से ही घर में धन और वैभव की देवी माता लक्ष्मी का वास हो जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार धनतेरस की शाम से दीपावली की रात्रि तक अपने पूजा गृह में अखंड दीप जलाने से निर्धन व्यक्ति भी धनवान हो जाता है। इसी दिन धनाध्यक्ष नौ निधियों के अधिपति कुबेर की उपासना पांच घड़ों को भरकर लोग उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। आज के दिन चांदी एवं सोने का क्रय विशेष शुभ होता है। कर्मकांड विशारद, पं रवि पांडेय ने कहा कि धनतेरस का पर्व प्रदोष कालीन त्रयोदशी तिथि में ही संपन्न होता है। इस दिन आरोग्यता की प्राप्ति के निमित्त भगवान धन्वंतरि देव की पूजा गंध पुष्प धूप दीप आदि के द्वारा प्रदोष काल में की जाती है। इसी दिन अकाल मृत्यु के भय से निवारण के लिए घर के बाहर वैदिक देवता यम के निमित्त दीप प्रज्वलित कर उनकी पूजा की जाती है।
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