जौनपुर। नगर पालिका परिषद जौनपुर की 490 दुकानों को कौड़ियों के भाव किराये पर देने के मामले की जांच तीन अधिकारियों की टीम कर रही है। साथ ही मानीटरिंग अपर जिलाधिकारी राज कुमार द्विवेदी कर रहे हैं। इनके द्वारा तैयार लेखा-जोखा के मुताबिक अब तक इन दुकानों से पिछले 10 साल में ही 18 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति हुई है।
नगर पालिका प्रशासन द्वारा लीज पर दी गईं दुकानों में लाल बहादुर शास्त्री मार्केट में 41, भगत सिंह पार्क क्षेत्र में 36 दुकानें शामिल हैं। इसके बाद भगत सिंह न्यू मार्केट में 10, जलकल परिसर में 18, सब्जी मंडी में 51, मंडी नसीब खां उत्तम टाकिज के पीछे 9, नगर पालिका उत्तरी गेट 9, नगर पालिका दक्षिणी गेट के क्षेत्र में 13, हरगोविंद सिंह मार्केट में 14, पौण्ड घर इलाके में 45 दुकानें हैं। वहीं, सुतहट्टी बाजार में 6, माल गोदाम रोड इलाके में 4, ईशापुर मोड़ पर पर 3,नक्खास में 26, रूटह्हा पानी टंकी के पास 5, इंदिरा मार्केट नीचे की 57 और इंदिरा मार्केट ऊपरी तल पर 57 दुकानें हैं। जबकि सराय पोख्ता पुरानी कोठरी में 57, लाइन बाजार पुरानी चुंगी में 5, सरायपोख्ता मीट मार्केट में 14, मछली बाजार में 07, पेट्रोल पंप के बगल 2 और उमरपुर हरिबंधनपुर 1 दुकानें शामिल हैं। इन दुकानों में 81 दुकानें तो ऐसी हैं, जिनका किराया 100 रुपये से भी कम है। हैरानी की बात तो यह कि कौड़ियों के भाव लीज पर दी गई इन दुकानों का 23 लाख 4580 रुपये किराया भी कई सालों से नगर पालिका में नहीं जमा हुआ है। इससे नगर पालिका को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ये दुकानें ऐसे इलाकों में हैं, जहां पांच से दस हजार रुपये के नीचे के किराये की दुकानें ही नहीं मिल सकती है। जिसके बाद तीन अधिकारियों की टीम गठित की गई है। हालांकि प्रारंभिक जांच के दौरान यह भी पता चला है कि 25 से 30 प्रतिशत ऐसे लोगों का भी नाम सामने आ रहा है, जो मर चुके हैं। जबकि इसके बाद भी उनके नाम पर दुकानें आवंटित हैं। इसी तरह 30 से 40 प्रतिशत ऐसे भी दुकानदार हैं, जो नाममात्र का किराया देते हैं। इस संबंध में अपर जिलाधिकारी का कहना है कि तीन हजार रुपये प्रति माह, जो की न्यूनतम किराया है के हिसाब से देखा गया तो पिछले 10 साल में 18 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। फिलहाल, अभी जांच चल रही है।