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10 फीट दूर मंदिर बनवाने के लिए कराया भूमि पूजन

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जालौन। जिला पंचायत की भूमि पर बने धार्मिक स्थल को ढहाने के मामले में प्रशासन के आश्वासन पर बाद बुधवार को जिला पंचायत अध्यक्ष, उरई और माधौगढ़ विधायक ने पहुंचकर अधिकारियों से बात की। इसके बाद उक्त स्थल से 10 फीट की दूरी पर मंदिर निर्माण कराने पर सहमति बनी। तीनों जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में भूमि पूजन कराया गया।
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जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी विजय प्रकाश एवं एसडीएम अंकुर कौशिक की उपस्थिति में जेसीबी ने जिला पंचायत की भूमि पर बने धार्मिक स्थल को ढहा दिया गया था। इससे क्षेत्रीय लोगों और हिंदू संगठनों में आक्रोश बढ़ गया। देर रात तक थाने में बैठक होने के बाद दो सदस्यीय टीम के चिह्नीकरण के आधार पर जमीन तय करके मूर्ति स्थापना का निर्णय लिया गया था।
बुधवार को सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन व जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी नगर में पहुंचे। जहां उन्होंने जिला पंचायत के एएमए विजय प्रकाश और एसडीएम अंकुर कौशिक को बुलाकर बात की। इसके बाद पूर्व में बने मंदिर की जगह को छोड़कर उससे 10 फीट पहले रोड की ओर राधा कृष्ण मंदिर बनाए जाने की सहमति बनी। सहमति के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पं. राजा महाराज ने मंदिर का भूमि पूजन कराया। इसके बाद लोगों ने खुश होकर जय श्रीराम के नारे लगाए। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष गिरीश गुप्ता, सतीश सिंह सेंगर, अविनाश सेंगर, रामू गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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ठेस पहुंचाने वालों कार्रवाई कराएंगे
जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी और सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने कहा कि राधाकृष्ण मंदिर को प्रशासन द्वारा तोड़ा जाना गलत है। अतिक्रमण को हटाया जा रहा था। मंदिर तोड़ने के लिए मना किया गया था। इसके बावजूद मंदिर तोड़कर लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी कराई जाएगी।
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प्रशासन नहीं जनप्रतिनिधियों की चली
जिला पंचायत की जिस जमीन पर राधाकृष्ण मंदिर बना था। प्रशासन द्वारा उसे तोड़ने के बाद उसी परिसर में किसी दूसरे स्थान पर मंदिर को स्थापित करने की बात कह रहा था। इसके लिए जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी विजय प्रकाश एवं एसडीएम अंकुर कौशिक ने इसी परिसर में मुख्य गेट के बगल में जहां ट्रांसफार्मर रखा है। उस स्थल को मंदिर बनाए जाने के लिए चिह्ति किया था। पर मंदिर बनाए जाने की सहमति नहीं बन सकी। जिसके बाद दबाव के चलते जिस स्थान पर पूर्व में मंदिर बना था। उस स्थान को आगे की ओर 10 फीट छोड़कर रोड साइड में मंदिर बनाए जाने पर सहमति बनी।
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