बेटी निशा के साथ किन्नर तमन्ना
- फोटो : ORAI
उरई। इंसानों में तो बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे और बातें सुनने को कई मिल जाएंगी। पर हकीकत देखनी हो तो एक नजर किन्नर समाज में जाए। जहां बसहारों, अनाथों को अपना बनाने की इंसानियत भी दिख जाएगी। ऐसी ही इंसानियत की झलक मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर की किन्नर तमन्ना में भी दिखाई देती है। जिन्होंने नब्बे के दशक में परेश रावल व पूजा भट्ट की फिल्म ‘तमन्ना’ की तरह ही एक बेटी को सड़क से उठाया और उसे गले से लगाया। उसे न सिर्फ लाडो सा प्यार दिया बल्कि अब सब कुछ न्यौछावर करने को भी तैयार है।
शहर में चल रहे किन्नरों के अखिल भारतीय सम्मेलन में हिस्सा लेने आई किन्नर तमन्ना ने बताया कि करीब 6 साल पहले नरसिंहपुर के पास ही एक गांव में सुबह के वक्त भीड़ लगी देखी। पास जाकर देखा तो एक पॉलिथीन में नवजात बच्ची लिपटी हुई थी। हर कोई उस बच्ची की बेबसी को देख तो रहा था पर डर से उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। तभी न जाने कहां से कलेजे में ममता जागी और झट से उस बच्ची को उठाकर अपने सीने से लगा लिया। तब से बच्ची उनके पास ही है। तमन्ना ने बच्ची को अपना नाम निशा दिया और उसे लेकर वे सम्मेलन में भी आई। तमन्ना का कहना है कि अब तो सिर्फ इतना ही इच्छा है कि बेटी को पढ़ा लिखा कर किसी लायक बना दूं और उसके हाथ पीले कर दूं। जिंदगी का यही मकसद है।
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फोटो-11 किन्नर शकीला बाई।
ढोलक के साथ साथ भ्रष्टाचार की भी बैंड बजाई
वर्ष 2012 से 17 तक मोठ (झांसी) नगर पंचायत के अध्यक्ष रह चुकी शकीला बाई ने बताया कि राजनीति में आकर उन्हें जनता के लिए कुछ करने का मौका मिला। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी और क्षेत्र की जनता को पानी, बिजली व सड़क की सुविधाएं मुहैय्या कराई। प्रयास किया कि नगर पंचायत को नगर पालिका का दर्जा मिल जाए। पर कुछ कारणों से यह सपना अधूरा रह गया। वैसे जनप्रतिनिधि रहते हुए उन्हें अपनी जनता का भरपूर प्यार और समर्थन मिला।