फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न्यायालयों के काम काज हिंदी में ही किए जाए

विज्ञापन
कार्यक्रम में मौजूद अधिवक्ता - फोटो : ORAI
विज्ञापन
उरई। अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत जिला जजी परिसर में संगोष्ठी हुई। जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष यज्ञदत्त त्रिपाठी ने कहा कि
विज्ञापन

हिंदी किसी की कृपा पर नहीं बल्कि अपने बलबूते पर आगे बढ़ी है। देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी ही है।
कहा कि निचली अदालतों में उर्दू और फारसी चलती रही। 18 अप्रैल 1900 में मैकडोलविन जब आगरा और अवध संयुक्त प्रांत के गवर्नर बने तब उन्होंने निचली अदालतों में हिंदी में काम करने की अनुमति प्रदान की।
एडीआर के प्रदेश समन्वयक अनिल शर्मा ने हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाए जाने पर जोर दिया। कहा कि सर्वाधिक लोकप्रिय होने के कारण भाषा राष्ट्र भाषा का दर्जा मिलना ही चाहिए। पूर्व डीजीसी सिविल रमाकांत द्विवेदी ने कहा हाईकोर्ट के पूर्व जज प्रेमचंद्र गुप्ता ने सबसे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदी में फैसला देने की शुरुआत की। इस काम को बाद में कई हाईकोर्ट के कई जजों ने आगे बढ़ाया, लेकिन अभी भी सुप्रीम कोर्ट में काम शुरू नहीं हुआ इसके लिए सरकार को सुप्रीम कोर्ट को सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिला बार संघ के उपाध्यक्ष व कलक्ट्रेट प्रभारी अवधेश कुमार निरंजन बृजबिहारी गुप्ता, पंकज वर्मा, राकेश नीलम, सुलेखा सिंह आदि अधिवक्ताओं ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट में भी हिंदी में कामकाज होना चाहिए। संगोष्ठी की अध्यक्षता जिला बार संघ के अध्यक्ष सुरेश चंद गौतम ने व संचालन बार के महासचिव जितेंद्र यादव व रमाकांत द्विवेदी ने किया। इस दौरान भूपेंद्र अहिरवार, राजवीर भदौरिया, सुधीर मिश्रा, संजीव दीक्षित, अमित यादव, प्रमोद कुशवाहा, कैलाश अहिरवार, प्रयाग नारायण, सुरेश दीक्षित, श्याम शर्मा, दीपक श्रीवास्तव, सत्यवीर, रामआसरे भी मौजूद रहे।

अधिवक्ता संघ के सभागार में मौजूद अध्यक्ष व सचिव व अन्य- फोटो : ORAI

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें