कोंच। कस्बे के सामुदायिक शौचालयों का बुरा हाल था। लोगों को मजबूरी में खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा था क्योंकि सामुदायिक शौचालयों में गंदगी की भरमार थी। इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से 30 दिसंबर के अंक में प्रकाशित किया था जिसका असर यह हुआ कि कस्बे के सभी शौचालयों में नगर पालिका ने सफाई अभियान चलाकर साफ कर दिए।
बता दें कि नगर पालिका द्वारा लगभग दर्जन भर सामुदायिक शौचालय बनवाए गए हैं ताकि इलाके के लोग खुले में शौचक्रिया के लिए न जाएं लेकिन कस्बे में बने सामुदायिक शौचालयों का बुरा हाल होने से लोग उनका प्रयोग तक नहीं कर पा रहे थे। गोखले नगर में बने सामुदायिक शौचालय की हकीकत तो यह थी कि बाहर से तो शौचालय बढ़िया दिख रहा था लेकिन उसके अंदर गंदगी का अंबार रहता था। फर्श पर मोटी मोटी धूल जमी थी और दीवारों में चारों ओर मकड़ी के जाले लगे थे। इसके अलावा लेट्रिन शीटें भी बुरी तरह गंदी थीं।
मुख्य बाजार एवं आसपास में बने टायलेट का भी बुरा हाल होने से लोग काफी परेशान थे। टायलेट की बदबू से दुकानदार बैठ भी नहीं पा रहे थे। ‘अमर उजाला’ ने इस समस्या को 30 दिसंबर के अंक में ‘बाहर से चमक रहे शौचालयों में गंदगी के अंबार’ शीर्षक से खबर को प्रकाशित किया था। इसके बाद खबर का असर यह हुआ कि उच्चाधिकारियों ने नगर पालिका को साफ सफाई कराने के कड़े निर्देश दिए और नगर पालिका प्रशासन द्वारा मामले को गंभीरता से लेकर कस्बे के सार्वजनिक शौचालयों तथा टॉयलेटों में अभियान चला कर सफाई कराई गई। ईओ बुद्धि प्रकाश ने कर्मचारियों को भी कड़े निर्देश दिए है कि समय समय पर शौचालयों की साफ सफाई होती रहे जिससे लोगों को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
30 दिसंबर को प्रकाशित खबर का पीडीएफ- फोटो : ORAI