कालपी। दरगाह में विवाद के बाद तीसरे दिन मंगलवार को भी फोर्स तैनात रहा। एसडीएम, सीओ सहित पुलिस बल मौके पर रहा। आसपास इलाके में सन्नाटा पसरा रहा। खानकाह की तरफ आने जाने में भी लोग भी हिचकते रहे।
जिस दरगाह में 24 घंटे रौनक रहती थी अब वहां सन्नाटा का आलम है। प्रशासन व पुलिस के अलावा कोई नही दिखाई दे रहा है। लोग दरगाह विवाद पर बोलने से भी कतरा रहे हैं। कई लोगों से बात करने की कोशिश कि गई पर लोग तैयार नही हुए। रविवार को खानकाह मोहम्मदिया दरगाह परिसर में प्रबंधन विवाद को लेकर दो कमेटियों के विवाद के मामले में पुलिस में दो आरोपियों रिसाल उर्फ भोलू निवासी बील्हापुर कोतवाली भोगनीपुर तथा शोएब निवासी राजेपुरा कोतवाली कालपी को पकड़ा है। कोतवाल संतोष सिंह ने बताया कि अन्य फरार आरोपियों के तलाश में दबिश दी जा रही हैं जल्द से जल्द अन्य आरोपियों को पकड़ा जाएगा।
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करीब 400 साल पुरानी दरगाह, पूरी होती मुरादें
कालपी। खानकाह शरीफ दरगाह क्षेत्र की प्राचीन दरगाह है। यह मीर सैय्यद मोहम्मद तिरमिजी की दरगाह है। जो लगभग 400 वर्ष पुरानी बताई जाती है। यहां आज भी देश प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में सभी धर्मों के लोग मुरादें मांगने आते हैं। यहां दारुल उलूम मोहम्मदिया के नाम से एक मदरसा भी है जो प्राचीन समय से संचालित हो रहा है। इस मदरसे में दूसरे राज्यों के बच्चे उर्दू, अरबी, फारसी की शिक्षा ग्रहण करते रहे हैं। हाईवे पर बनी यह दरगाह आसपास इलाके में बहुत प्रसिद्ध है। यहां जियारत के लिए बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगता है। उर्स आदि मौकों पर हजारों की भीड़ उमड़ती है। इस्लामिक जानकार बताते हैं कि यह दरगाह मीर सैय्यद मोहम्मद तिरमिजी की दरगाह है। दरगाह पर इलाके के लोगों की अटूट आस्था है। यहां दूर-दूर से बीमार लोग अपने व अपनों के इलाज के लिए आते हैं। माना जाता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। (संवाद)