उरई। गर्मी और उमस के बीच बुखार के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी हो या सीएचसी, पीएचसी सभी जगहों पर सुबह से ही मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। वायरल के साथ-साथ डेंगू और कोरोना के भी मरीज मिलने से स्थिति बिगड़ी हुई है। सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा का कहना है कि डेंगू और कोरोना की अधिक से अधिक जांच कराई जा रही है। इसके अलावा वायरल के रोगियों को दवाओं के साथ साथ पूरी सावधानी बरतने की भी सलाह दी जा रही है।
बता दें कि बीते करीब दस दिनों से बुखार, खांसी व जुकाम के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल की ओपीडी में जिन मरीजों की संख्या पांच से सात सौ के बीच रहा करती थी, वहां इस वक्त 1000 के करीब मरीज पहुंच रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव अग्रवाल का कहना है कि 8 से 12 साल तक के बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं। इनके खान पान का पूरा ध्यान रखने की आवश्यकता है। थोड़ी सी भी दिक्कत होने पर तत्काल डॉक्टरों की सलाह लेना ही ठीक रहेगा। मेडिकल कॉलेज में चिकित्साधिकारी प्रशांत निरंजन के मुताबिक बारिश और तेज धूप के इस मौसम में खानपान पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। तला व खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों को काने से परहेज करना चाहिए।
आसपास साफ सफाई रखें, ताकि मच्छर न पनप सकें। सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज दोनों ही अस्पतालों में डॉक्टरों की टीमें मुस्तैद की गईं है। कोरोना और डेंगू के वार्ड भी बनाए गए हैं। बस लोगों को बीमारियों से बचने के लिए स्वयं भी सावधानी बरतनी होगी। एलटी जितेंद्र गुप्ता का कहना है कि पैथालॉजी में भी जांच कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।
उरई। पानी बरसने के बाद मच्छर तेजी से बढ़ते हैं। ऐसे में मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया के होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए साफ सफाई का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। साफ और उबला पानी पीना चाहिए और ताजा और गर्म भोजन का सेवन करना चाहिए। बेकार पड़े बर्तन, टायर, गमलों आदि में पानी एकत्र न होने दें और कूलर का पानी समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। गंदगी और जलभराव के निस्तारण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यह जानकारी सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा ने दी।
उन्होेंने बताया कि सभी अस्पतालों में फीवर हेल्प डेस्क स्थापित कर दी गई है। बुखार के रोगियों का चिह्नीकरण तथा जांच एवं उचित उपचार किया जा रहा है। जिला अस्पताल में दस बेड और सीएचसी में चार-चार बेड डेंगू पीड़ित मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। जिला अस्पताल,आठ सीएचसी और 40 पीएचसी में मरीजों की जांचें और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि बुखार, सिरदर्द, जोड़ों का दर्द, कंधे जाम हो जाना, अधिक कमजोरी व शरीर में पानी की कमी होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल या योग्य चिकित्सक से संपर्क करें। बिना योग्य चिकित्सक की सलाह के एंटी बायोटिक दवाओं का प्रयोग न करें। बुखार के रोगी केवल पैरासिटामोल टेबलेट का ही प्रयोग करें।
सीएमओ ने निर्देश दिया कि प्राइवेट डॉक्टर और चिकित्सालय अपने यहां आने वाले बुखार, मलेरिया और डेंगू के मरीजों का विवरण प्रतिदिन सीएमओ कार्यालय में देना सुनिश्चित करें। सूचना न देने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्राइवेट अस्पताल संचालक भी अपने अस्पतालों में फीवर हेल्प डेस्क बनाएं और संक्रमण नियंत्रण के लिए प्रोटोकाल का पालन करना सुनिश्चित करें।