बसपा में अंतिम समय तक बागियों को पार्टी से बाहर निकालने, टिकटों में फेरबदल और नेतृत्व के प्रति दिखाई देने वाले अविश्वास से लग रहा था कि इस बार बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन डगमगा जाएगा लेकिन हुआ इसके एकदम विपरीत।
जालौन में जिला पंचायत चुनाव से बहुजन समाज पार्टी ने अपने गढ़ में वापसी की है। लंबे समय से चुनावों में अपनी जीत को तरसती बसपा ने इस बार जिला पंचायत के चुनाव में सत्ताधारी भाजपा से बेहतर प्रदर्शन कर 25 में से 7 सीटों पर जीत हासिल की है। जबकि भाजपा 6 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही है।
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वहीं समाजवादी पार्टी सिर्फ चार सीटों पर ही सिमटकर रह गई है। जबकि कांग्रेस और जनता दल (वीपी सिंह) के खाते में एक एक सीटें आई हैं। इसके अलावा 6 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों का कब्जा रहा है। हालांकि बसपा में अंतिम समय तक बागियों को पार्टी से बाहर निकालने, टिकटों में फेरबदल और नेतृत्व के प्रति दिखाई देने वाले अविश्वास से लग रहा था कि इस बार बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन डगमगा जाएगा लेकिन हुआ इसके एकदम विपरीत।
पार्टी ने बुंदेलखंड की धरती पर एक बार फिर से वापसी की है। कुल मिलाकर आने वाले समय में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और बसपा में कांटे की टक्कर दिखाई देगी। जिसमें निर्दलीय निर्णायक भूमिका भी निभा सकते हैं।
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इनकी हुई जीत
बबीना - निर्दोष सिंह, (निर्दलीय) 10322
अकबरपुर- अतर सिंह (बसपा), 6588
परासन- रणविजय (भाजपा), 4708
चतेला- ज्ञानसिंह(भाजपा) , 4708
ऐर- कैलाश राजपूत (बसपा), 16962
डकोर- उमा देवी (निर्दलीय),10300
जैसारी कला- अर्चना (सपा) ,6065
गढऱ- मनोज(बसपा) ,4145
परिवार में 5वीं बार आई जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी
जिला पंचायत सदस्य चुनाव परिणाम सामने आने के बाद कहीं-कहीं पर कुर्सी पारिवारिक विरासत के रूप में भी सामने आई। ऐसा ही मामला डकोर सीट से देखने को मिला। जहां से इस बार जिला पंचायत सदस्य की सीट निर्दलीय प्रत्याशी उमा देवी ने जीती है। इससे पहले उमा के पति शिशुपाल सिंह चार बार जिला पंचायत सदस्य और इसी में एक बार जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
सबसे पहले 1995 में शिशुपाल जिला पंचायत सदस्य का चुनाव डकोर सीट से ही जीते थे। इसके बाद 2000 में सीट का आरक्षण बदला तो शिशुपाल मैदान में नहीं उतरे। अगले चुनाव 2005 में शिशुपाल सिंह ने दिरावटी से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता। इसी तरह 2010 में भी शिशुपाल ने डकोर सीट से दोबारा चुनाव लड़ा और न सिर्फ जिला पंचायत की सीट पर ही कब्जा किया बल्कि जिला पंचायत अध्यक्ष भी बने।
पिछली बार यानि 2015 में भी शिशुपाल डकोर से चुनाव लड़कर जीते। इस बार महिला (पिछड़ा वर्ग) सीट होने के कारण शिशुपाल ने अपनी पत्नी उमा देवी को चुनाव मैदान में उतारा और सोमवार को आए परिणाम में उमा देवी विजेता घोषित की गईं।
बेटा और बहू भी बने बीडीसी
बात सिर्फ जिला पंचायत चुनाव तक ही सीमित नहीं रही। शिशुपाल के बेटे तेजपाल और बहू नेहा यादव ने भी इस बार बीडीसी की सीट पर कब्जा कर लिया। निवर्तमान ब्लाक प्रमुख डकोर तेजपाल ने इस चुनाव में सिवडी से जीत दर्ज की है। वहीं तेज की पत्नी नेहा जैसारी से बीडीसी चुनी गई हैं।