जालौन/ कोंच। मोहर्रम के पर्व पर नगर के 23 ताजियादारों ने इमाम चौक पर ही ताजिए रखे। कोविड 19 की गाइड लाइन के चलते नगर में ताजियों का जुलूस नहीं निकाला। देर शाम सभी ताजियों को मैदान-ए-कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान प्रशासनिक अमला भी चाक चौबंद रहा।
नगर के सभी 23 ताजिया धारकों ने इमाम चौक पर ही ताजियों को रखा। ताजियादार शमशाद, मंगू शाह, याकूब शाह, मजीद शाह, हफीज मुकेरी आदि के ताजियों का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा घरों पर भी फातिहा व मर्सिया पढ़ी गईं। देर शाम कर्बला में ताजियों को सुपुर्द-ए -खाक किया गया। ताजिया धारक शमसाद न्यारिया, अफरोज शाह, अनवार अहमद, उस्मान, मुन्ना, आसिफ खान, शाहरूख खान, फैज नागपुरी, शहबाज बाबा, बाबू भाई, आकिब मिस्त्री, इकबाल मंसूरी आदि मौजूद रहे।
कोंच प्रतिनिधि के अनुसार मोहर्रम की नौंवी पर ताजिये इमाम चौकों पर रखे गए। तमाम अकीदतमंद वहां पहुंचे तथा धार्मिक परंपराओं के मुताबिक फातिहा व मरसीहा पढ़ा। अपने-अपने घरों में लोगों ने तबर्रुक तथा लंगर का वितरण किया। शुक्रवार की शाम को मन्नती ताजिया तथा अन्य ताजियों को लेकर कुछ लोग कर्बला मैदान में पहुंचे और ताजियों को दफन कर दिया गया।
इमामबाड़ों व चौक पर ताजियों में हुई फातिहा
उरई संवाद के अनुसार नगर उरई में कोरोना के चलते इस बार मोहर्रम का जुलूस नहीं निकाला गया। एक जगह ताजियों को रखकर फातिहा और लंगरों के कार्यक्रम हुए। मोहल्ला अथाई स्थित इमामबड़े में दो ताजिये रखे गए। नगर के छोटे-बड़े 24 ताजियों पर अकीकतमंदों ने फातिहा पढ़ी। इसके बाद दिनभर इक्का दुक्का ढोलों की मातमी धुन नगर में सुनाई देती रही। इस दौरान सुन्नियों ने अखाड़ा खेलकर रस्म अदा की तो शिया समुदाय के लोगों ने जंजीर व कमा से मातम मनाया। अकीकतमंदों ने ताजियों के पारंपरिक रूट पर केवल लंगर वितरण किया। गुरुवार व शुक्रवार को मरसिया व नोहे पढ़ने की सदाएं सुनाई देती रहीं। नगर में बजरिया के विभिन्न मोहल्लों के प्रत्येक घर में मातम का माहौल नजर आया। मातमी दौर का यह सिलसिला देर रात्रि तक चलता रहा।
मातम कर इमाम हुसैन को याद किया
मुहम्मदाबाद संवाद के अनुसार मोहर्रम का त्योहार शांति पूर्वक मनाया गया। अकीदतमंदों ने इमामबाड़ों और इमाम चौकों पर ताजिया रखकर फातिहा दिलाई। कोरोना नियमों का पालन कर सभी ने ताजियों की जियारत कर दुआएं मांगी। बच्चों ने मातमी धुन बजाकर इमाम हुसैन को याद किया। करबला में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन की याद में गुरुवार की रात व शुक्रवार को दिनभर ताजियों पर फातिहा और लंगरों का दौर चलता रहा। ताजिया कमेटी ने जुलूस पर पाबंदी व कोरोना महामारी को देखते हुए जुलूस नहीं निकाला। बल्कि इमाम बाड़े एवं इमाम चौक पर ही ताजियों को एक जगह पर रखा गया। जायरीनों ने फातिहा दिलाई। इसके बाद ताजियों को गांव बाहर स्थित कर्बला में ठंडा कर दिया गया। बच्चों ने भी इमाम हुसैन की शहादत को लेकर ढोल, लगड़ियां बजाकर मातम मनाया।