उरई। पंजाब प्रांत के सिख समुदाय में बढ़ई परिवार में जन्मे स्वर्गीय ज्ञानी जैल सिंह ने देश के उच्चतम पद राष्ट्रपति के पद पर पहुंचकर विश्वकर्मा समाज का मान बढ़ाया है। यह बात अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में जिलाध्यक्ष महेश विश्वकर्मा ने ज्ञानी जैल सिंह की पुण्यतिथि के मौके पर कही।
उन्होंने कहा कि ज्ञानी जैल सिंह का बचपन का नाम जनरैल सिंह था। उन्होंने अमृतसर शहीद सिख मिशनरी कालेज से गुरु ग्रंथ का पाठ कंठस्थ याद लिया था। वहीं से इन्हें ज्ञानी की उपाधि मिली। प्रांतीय सचिव रामलाल विश्वकर्मा ने कहा कि स्व. ज्ञानी जैल सिंह बहुत ही संघर्षशील रहे। विश्वकर्मा समाज के गौरव और सम्मान बढ़ाने पूर्व राष्ट्रपति की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हैं। इस दौरान सेवा समिति के महामंत्री श्यामबाबू विश्वकर्मा, रामलाल, केके शर्मा, मुकेश विश्वकर्मा, मोहित विश्वकर्मा, जलज विश्वकर्मा, जितेंद्र विश्वकर्मा, दयाशंकर आदि रहे।