फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा : सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट लाइक करना प्रसारण नहीं माना जा सकता, एफआईआर रद्द

Fri, 20 Oct 2023 02:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

आरोप पत्र दाखिल होने के बाद सीजीएम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए गैर जमानती वारंट जारी कर दिया, जिसे याची ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि साइबर क्राइम सेल की रिपोर्ट से पता चलता है कि उसके फेसबुक अकाउंट पर कोई भड़काने संबंधी सामग्री नहीं मिली थी।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट को लाइक करने मात्र से उस पोस्ट को प्रकाशित या प्रसारित नहीं माना जा सकता। इसके चलते इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 67 लागू नहीं होगी, जिससे शांतिभंग के लिए खतरा पैदा होता है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने मोहम्मद इमरान काजी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को रद्द करते हुए दिया।

विज्ञापन


याची के खिलाफ आगरा जिले के मंटोला थाने में उत्तेजक सामग्री को प्रसारित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद 100 लोगों की सभा हुई। मुस्लिम समुदाय के 600-700 लोगों द्वारा बिना अनुमति जुलूस निकाला गया और उससे शांतिभंग होने का गंभीर खतरा खड़ा हो गया।

आरोप पत्र दाखिल होने के बाद सीजीएम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए गैर जमानती वारंट जारी कर दिया, जिसे याची ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि साइबर क्राइम सेल की रिपोर्ट से पता चलता है कि उसके फेसबुक अकाउंट पर कोई भड़काने संबंधी सामग्री नहीं मिली थी।
विज्ञापन


सरकारी अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि आरोपी को चौधरी फरहान उस्मान की पोस्ट पसंद आई थी, जिसमें यह उल्लेख था कि वे भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के लिए कलेक्ट्रेट के सामने एकत्र होंगे। कोर्ट ने कहा कि सुबूतों के आधार पर याची के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। लिहाजा, कोर्ट ने उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें