न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत तरीके से पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि भड़ली नवमी के दिन विवाह जैसे मांगलिक कार्य करना शुभ है। जिन लोगों के विवाह का पूरे वर्ष कोई मुहूर्त नहीं निकल रहा है तो वे लोग भड़ली नवमी के दिन शादी कर सकते हैं। इस दिन शादी करने से किसी भी प्रकार का दोष नहीं लगता है।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि इस साल भड़ली नवमी पर शिव, सिद्ध और रवि योग बन रहे हैं। इस योग में मांगलिक और शुभ काम करना अच्छा माना जाता है। शिव योग सात जुलाई को सुबह 10 बजकर 38 मिनट से आठ जुलाई सुबह नौ बजे तक रहेगा। सिद्ध योग आठ जुलाई सुबह नौ बजे से नौ जुलाई को सुबह बजकर 40 मिनट तक रहेगा।
उन्होंने बताया कि वेद-शास्त्रों के अनुसार भड़ली नवमी को अक्षय तृतीया की तरह की अबूझ माना जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त देखे ही विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य हो सकते हैं। इसके साथ ही भड़ली नवमी के दिन खरीदारी, गृह प्रवेश या फिर नया कारोबार शुरू करने के लिए काफी अच्छा माना जाता है। संवाद
भड़ली नवमी के बाद होता है चातुर्मास का आरंभ
उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, भड़ली नवमी के दो दिन बाद देवशयनी एकादशी होती है। इसके साथ चातुर्मास शुरू हो जाता है। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु चार मास के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही अगले चार मास के लिए भगवान शिव सृष्टि का संचार करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं।