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दिल, लिवर, किडनी के लिए खतरनाक है पाम ऑयल

Tue, 02 Feb 2016 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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हाथरस। जिलेभर में सरसों के तेल और रिफाइंड में सेहत को चौपट करने वाले सस्ते विदेशी पाम ऑयल की मिलावट जोरों से की जा रही है। शहर के खुले मैदानों में पाम ऑयल के टैंकर गर्म किए जा रहे हैं। कुछ समय पहले एसडीएम ने भी ऐसा ही एक टैंकर पकड़ा, जो जुर्माना देने के बाद छोड़ दिया गया था। सरसों के तेल और रिफाइंड से इस तेल की कीमत एक चौथाई है। पाम ऑयल की मिलावट से जहां दुकानदारों को मोटा मुनाफा हाथ लग रहा है वहीं इसका नियमित रूप से इस्तेमाल करने वाले लोग दिल, लिवर और किडनी के रोगों की चपेट में आते जा रहे हैं। 
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तेल के कई कारोबारी पाम ऑयल के टैंकर दक्षिणी राज्यों से मंगाकर मिलावट को अंजाम दे रहे हैं। पाम ऑयल की खासियत है कि यह रखे जाने पर जम जाता है। टैंकर में तेल जमने पर इसे किसी मैदान में ले जाकर कंडे और लकड़ी जलाकर गर्म किया जाता है और इसके बाद उसे खाली कर लिया जाता है। हाल ही में ऐसे ही एक टैंकर पर हमारी नजर पड़ी, जिसे आधी रात को एकांत में ले जाकर चुपचाप गर्म किया जा रहा था। साफ है कि जिले में ताड़ के तेल की खुली बिक्री न के बराबर है। ज्यादातर लोग खाना पकाने के लिए वनस्पति घी, रिफाइंड या सरसों के तेल का इस्तेमाल करते हैं। बावजूद इसके तेल कारोबारी बड़े पैमाने पर पाम ऑयल की खरीद दूसरे राज्यों से कर रहे हैं। निश्चित तौर पर इसे मिलावट में इस्तेमाल किया जा रहा है। 

सरसों के तेल में आधा पाम ऑयलतेल कारोबार के जानकार बताते हैं कि सरसों के तेल में इन-दिनों आधा पाम ऑयल मिलाया जा रहा है। ऐसा करने से प्रत्येक किलो पर दुकानदार को काफी रुपये बच जाते हैं। खुले रिफाइंड में भी पाम ऑयल की खूब मिलावट हो रही है। 
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पाम ऑयल में सिक रहे भटूरे, टिक्कीसेहत के लिए हानिकारक तेल का उपयोग सस्ते स्नैक्स बनाने में किया जा रहा है। फूड सेफ्टी अधिकारियों की लापरवाही से ज्यादातर ठेल वाले इसी पाम ऑयल में छोले भटूरे, टिक्की, गोल-गप्पे आदि बना रहे हैं। इससे लागत कम आती है और मुनाफा ज्यादा होता है। 
उच्च संतृप्त वसा का भंडार है विदेशी तेलजिला अस्पताल के डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि पाम ऑयल में उच्च् संतृप्त वसा की मात्रा दूसरे तेलों से कहीं ज्यादा होती है। इसकी मिलावट वाले तेल को रोज खाने से दिल की बीमारियों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। लिवर और किडनी पर भी बुरा असर पड़ता है। यह पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। कुछ साल पहले तक पाम ऑयल के इस्तेमाल पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा था। लोगों को खाना पकाने के लिए शुद्ध सरसों के तेल का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि इसमें असंतृप्त वसा होती है। जो दिल के लिए ज्यादा बेहतर है।
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