न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
विश्व मजदूर दिवस के मौके पर जहां एक ओर से मजदूरों के लिए कई योजनाओं के संचालन के दावे किए जाते हैं, लेकिन मनरेगा में पंजीकृत मजदूरों को अपने ही गांव में जॉब कार्ड होने के बावजूद काम नहीं मिल पाया है। पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़ों के अनुसार 13,897 मजदूरों ने मनरेगा के तहत कार्य करने के लिए मांग की थी, लेकिन इन मजदूरों को कार्य नहीं मिल सका है। हालांकि दूसरी ओर मनरेगा के तहत मांग के अनुसार कार्य दिए जाने के लिए शासन के स्पष्ट निर्देश हैं। यह निर्देश कागजों तक ही सिमट गए हैं।
गांव के रहने वाले ग्रामीणों को उनके गांवों में ही रोजगार मुहैया कराए जाने के लिए मनरेगा के तहत जॉब कार्ड बनाए जाते हैं। इन ग्रामीणों को मनरेगा में पंजीकृत किया जाता है। मनरेगा के तहत गांव में ही ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराए जाने के निर्देश हैं। इस क्रम में गांव में रोजगार को कार्ययोजना के तहत बनाया जाता है। इसके बाद इन मजदूरों को काम देकर रोजगार दिया जाता है। यहां पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत 99,259 जॉब कार्डधारक थे। इसमें से 62,515 मनेरगा जॉब कार्डधारकों ने अपने ही गांव में कार्य किए जाने की मांग की थी। इसके सापेक्ष 48,618 लोगों को ही मनरेगा के तहत कार्य मिल सका। 13,897 मजदूरों काम मिलने का इंतजार ही करते रहे। संवाद
पिछले वित्तीय वर्ष की एक रिपोर्ट
ब्लॉक डिमांड (मजदूर ) कार्य उपलब्ध (मजदूर)
हसायन 11243 8163
हाथरस 8062 6240
मुरसान 8653 6548
सादाबाद 10629 9019
सासनी 11121 8367
सहपऊ 4978 4229
सिकंदराराऊ 7827 6052
कुल 62515 48618
मेरा जॉब कार्ड जब बना था, उस समय तो काम दिया गया था, लेकिन कुछ कामों के बाद कार्य नहीं दिया गया। अब दूध बेचकर गुजारा कर रहा हूं। अपने आसपास के गांवों में दूध बेचने जाता हूं।
-कुंवरपाल, पीहुरा
हमारा जॉब कार्ड बना हुआ है, लेकिन मनरेगा के तहत कार्य में कभी कार्य करने का मौका नहीं दिया गया है। कार्ड तो बहुत दिन का बना हुआ है, लेकिन इस कार्ड का क्या फायदा
-योगेश कुमार, परसौरा
शासनादेश के अनुसार जॉब कार्डधारक की ओर से मांग करने पर 14 दिन में कार्य दिए जाने का प्राविधान है, लेकिन हम मांग करते ही मजदूर को सात दिन में ही कार्य उपलब्ध करा देते हैं।
-एके मिश्र, उपायुक्त मनरेगा।