संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
बृज की देहरी कहे जाने वाले इस शहर में होली का बड़ा महत्व है। बृज का क्षेत्र और कवियों की नगरी होने के कारण होली पर यहां तरह-तरह के आयोजन होते थे। हास्य व्यंग्य के आका कवि काका तो होली के अवसर पर यहां हास्य व्यंग्य का कार्यक्रम प्रस्तुत करते थे।
उसे महामूर्ख सम्मेलन का नाम दिया जाता था। इस सम्मेलन में शामिल कुछ कवियों को तरह-तरह की उपाधि से भी नवाजा जाता था। एक बार तो काका ने इस महामूर्ख सम्मेलन में गधे का ही अभिनंदन कर दिया था और दर्शक हंसते-हंसते लोट-पोट हो गए थे।
हर वर्ष दी जाती थी एक समाजसेवी को हाथरस श्री की उपाधि
शहर में कई होली मिलन समारोह आज भी होते हैं, लेकिन शहर में लंबे समय तक धुलेड़ी के दिन शाम को नगर पालिका प्रांगण में होली मिलन समारोह का आयोजन होता था। इस कार्यक्रम का संचालन बृज भाषा के कवि सुरेश चतुर्वेदी करते थे। शहर के एक समाजसेवी को हाथरस श्री की उपाधि से नवाजा जाता था। यह परंपरा लंबे समय तक चली। हालांकि कोरोना काल के चलते कई साल से यह आयोजन अब नहीं हो रहा।
काका और निर्भय हाथरसी का यह शहर प्रचीन परंपराओं का भी शहर है। होली के मौके पर काका हाथरसी अपना कीमती समय निकालकर महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन कराते थे। आज भी यहां परंपराएं जीवित हैं। रस की इस नगरी में होली की मस्ती अभी भी कायम है।
-गोपाल चतुर्वेदी, साहित्यकार
- होली के मौके पर काका हाथरसी महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन करते थे। आज भी इस तरह के आयोजनों की विशेष आवश्यकता है। आज सभी लोग पहले से ज्यादा तनावग्रस्त जीवन जी रहे हैं। ऐसे कार्यक्रम आयोजित होंगे तो तनाव कम होगा। - विद्यासागर विकल, साहित्यकार